अब दिल्ली-एनसीआर में उद्योग लगाने के लिए बीडा 209 हैक्टेयर जमीन रीको को देगा। सरकार की ओर से इसके लिए मंजूरी दे दी गई है। जमीन मिलने से नई इंडस्ट्रियल यूनिट्स की स्थापना आसान होगी और राज्य में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा। इसके साथ ही जगतपुरा अपैरल पार्क से जुड़ा रीको और जेडीए का जमीन विवाद भी खत्म हो गया है। समझौते के बाद महल रोड पर होटल, सर्विस सेक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ऑफिस जैसी गतिविधियों के लिए जमीन उपलब्ध होगी। इस फैसले से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बनने की संभावना है। बीडा को मिलेगा लगभग 110 करोड़ रुपये का राजस्व राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट-2024 के बाद कई उद्योगपति और कंपनियां एनसीआर इलाके में अपनी फैक्ट्रियां लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए राजस्थान सरकार ने जमीन देने की मंजूरी दे दी है। अब बीडा करीब 209 हैक्टेयर जमीन रीको को देगा। इससे उद्योगों को तुरंत जमीन मिल पाएगी और बीडा को लगभग 110 करोड़ रुपये का राजस्व मिल जाएगा, जिसे आसपास के इलाकों के विकास पर खर्च किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से राज्य में उद्योग लगाने का माहौल और मजबूत होगा और 350 करोड़ बिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। जगतपुरा में रीको देगा जेडीए को जमीन वहीं जगतपुरा स्थित अपैरल पार्क में कई सालों से जमीन से जुड़ी दिक्कतें चल रही थीं। यह पार्क 2014 में करीब 122 एकड़ में बनाया गया था। यहां सिर्फ टेक्सटाइल और अपैरल उद्योगों को जमीन दी जाती है। जमीन देने को लेकर खातेदार लंबे समय से 25% विकसित जमीन की मांग कर रहे थे। जेडीए के पास इतनी विकसित जमीन नहीं थी, इसलिए उसने रीको से अतिरिक्त जमीन मांगी थी। अब रीको और जेडीए के बीच हुए एमओयू के बाद रीको 4.57 हैक्टेयर जमीन जेडीए को देगा। यह जमीन 160 फीट रोड पर है, और इसे खातेदारों को विकसित कॉमर्शियल जमीन देने के लिए उपयोग किया जाएगा। जेडीए ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से महल रोड पर कॉमर्शियल गतिविधियों जैसे सेवा क्षेत्र, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, को-वर्किंग स्पेस, होटल और ऑफिस के लिए भी जमीन उपलब्ध होगी। महिलाओं और युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर गारमेंट और अपैरल सेक्टर में ज्यादातर महिलाएं काम करती हैं। इसलिए अपैरल पार्क में जमीन विवाद खत्म होने से महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए मौके बनेंगे। साथ ही पढ़े-लिखे युवाओं को भी आने वाले समय में अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छी नौकरियां मिलने का रास्ता खुलेगा। जिन किसानों ने अपनी जमीन के बदले विकसित जमीन की मांग की थी, उन्हें भी इस फैसले से राहत मिली है।


