झाबुआ नगर पालिका ने सोमवार को बस स्टैंड चौराहे से विजय स्तंभ तक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस दौरान कई गुमटियां, अस्थायी शेड और कच्चे चबूतरे हटाए गए। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर लोगों में गुस्सा और विरोध देखा गया, जिसमें भेदभाव के आरोप भी लगे। नगरपालिका अमला पुलिस और यातायात पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। कुछ दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने अतिक्रमण हटा लिए, जबकि कई स्थानों पर नगर पालिका की जेसीबी ने गुमटियों को ध्वस्त कर दिया। अतिक्रमण हटाने के लिए पहले ही मुनादी करवाकर नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें 27 नवंबर की जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा बैठक में कलेक्टर के निर्देशों का उल्लेख था। चूंकि लोगों ने इन नोटिसों को गंभीरता से नहीं लिया था, इसलिए अमले के पहुंचने पर अफरा-तफरी मच गई। लोग आनन-फानन में अपने अतिक्रमण हटाने लगे। नगरपालिका अमले ने अस्पताल के पास से भी गुमटियां और अस्थायी शेड हटाए। कार्रवाई के दौरान कई पूर्व पार्षदों ने अपना विरोध दर्ज कराया। वार्ड 16 के पूर्व पार्षद अविनाश डोडियार ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा, “शहर साफ और सुंदर होना चाहिए, लेकिन कार्रवाई हमेशा गरीबों पर ही क्यों होती है? शहर भर में पक्के अतिक्रमण हैं, लेकिन उन पर कभी कार्रवाई नहीं होती। हमेशा छोटे दुकानदारों को ही निशाना बनाया जाता है।” पूर्व पार्षद रशीद कुरैशी ने मांग की कि कार्रवाई पूरे शहर में एक समान चलनी चाहिए। उन्होंने नगर पालिका से छोटे दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की भी अपील की ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका ने कुछ लोगों को मोहलत दी, जबकि कुछ गुमटियों को तुरंत तोड़ दिया, जिससे उनमें रोष बढ़ गया। इस संबंध में सीएमओ मिलन पटेल ने बताया कि कल फिर से नोटिस जारी किए जाएंगे, जिसके बाद आगे अतिक्रमण हटाए जाएंगे। पटेल ने भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है।


