पन्ना में प्रांतीय जनपद सदस्य एकता संघ, जिला इकाई ने जनपद पंचायतों के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं और जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन को सोमवार को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ ने कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत पन्ना से मांग की है कि मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत जनपद सदस्यों को सौंपे गए दायित्वों और अधिकारों का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाए। संघ ने अपने ज्ञापन में बताया कि मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 44 के अनुसार, प्रतिमाह बैठक का प्रावधान है, जिसका अधिकार अध्यक्ष को है। अध्यक्ष के असफल रहने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को बैठक बुलाना अनिवार्य है। हालांकि, सदस्यों ने शिकायत की है कि तीन-तीन माह तक बैठकें नहीं होती हैं। इसके अलावा, सामान्य सभा में पारित होने वाले कार्यों को सीईओ द्वारा मनमाने ढंग से स्वीकृत या अस्वीकृत कर दिया जाता है। संघ का आरोप है कि सामान्य सभा की बैठक में पारित प्रस्तावों का पालन अनिवार्य होने के बावजूद, ये बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और पारित प्रस्तावों का क्रियान्वयन नहीं होता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि गठित समितियों के सभापतियों द्वारा बैठक के लिए लिखे गए पत्रों को अधीनस्थ सचिव ‘मजाक’ समझकर उनकी अवहेलना और अपमान करते हैं। इस मामले में सीईओ भी गंभीरता नहीं दिखाते। यात्रा भत्ते से वंचित संघ ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश जनपद सदस्य यात्रा भत्ता नियम लागू होने के बावजूद, जनपद द्वारा ‘नियम न होने’ की बात कहकर सदस्यों को यात्रा भत्ते से वंचित किया जा रहा है। सामान्य सभा में अधिकारियों द्वारा अक्सर यह कहा जाता है कि “आप लोगों का कोई अधिकार नहीं है,” जबकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधियों के अधिकार हैं। ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के उपयोगिता/पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जनपद सदस्य के हस्ताक्षर युक्त प्रपत्र को शामिल करने का प्रस्ताव लाया जाता है, जिसे यह कहकर अस्वीकार कर दिया जाता है कि “सरकार का ऐसा कोई आदेश नहीं है।” संघ ने इस व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने की मांग की है।


