केकड़ी सिटी थाना पुलिस ने कछुआ ठगी मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पिछले 18 महीनों से फरार चल रहे थे। इस धोखाधड़ी में 5.50 लाख रुपए की ठगी की गई थी। कछुआ दिलवाने के नाम पर 50 लाख झांसा दिया था थानाधिकारी कुसुमलता मीणा ने बताया- दौलाड़ा, बूंदी निवासी सत्यनारायण धाकड़ ने 1 जून 2024 को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। सत्यनारायण ने बताया कि मदन मोग्या नाम के व्यक्ति ने उसे झांसा दिया कि उसका एक डॉक्टर मित्र है जिसे कछुए की आवश्यकता है और वह इस काम से उसे 50 लाख रुपए दिलवा सकता है। कुछ दिनों बाद मदन मोग्या अपने दो साथियों प्रधान मोग्या और बन्ना लाल मोग्या के साथ आया। उन्होंने सत्यनारायण से कहा कि वे कछुआ लाकर देंगे लेकिन मुनाफे का आधा हिस्सा उन्हें देना होगा। सत्यनारायण, मदन मोग्या के बेटे को जानता था इसलिए वह उनके झांसे में आ गया। पीले कछुए के बदले दिए 5.50 लाख सत्यनारायण बताए गए समय पर साढ़े पांच लाख रुपए लेकर केकड़ी बस स्टैंड पहुंचा। वहां मदन मोग्या, प्रधान मोग्या, भंवर लाल मोग्या और बैजनाथ मोग्या ने उसे एक पीले रंग का कछुआ दिया, जिसके बदले में उसने साढ़े पांच लाख रुपए दे दिए। कुछ ही देर में कछुए की मौत रुपए देने के लगभग आधे घंटे बाद ही कछुआ मर गया। जब सत्यनारायण ने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने दूसरे कछुए की व्यवस्था करने में दो-पांच दिन लगने की बात कही। इसके बाद उन्होंने टालमटोल करना शुरू कर दिया और बाद में फरार हो गए। इस शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली विश्वसनीय सूचना के आधार पर राजपुरा, डबलाना, बूंदी निवासी मदन मोग्या (45) पुत्र श्रीमन और भंवरलाल मोग्या (32) पुत्र सूरजमल को 18 माह बाद गिरफ्तार किया। थानाधिकारी कुसुमलता मीणा ने यह भी बताया कि इस मामले में दतोब, टोंक निवासी प्रधान मोग्या (30) पुत्र हरजी मोग्या और शंभूनगर, केकड़ी निवासी बैजनाथ मोग्या (25) पुत्र लालाराम मोग्या को गत 28 सितंबर को ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आईजी राजेंद्र सिंह और एसपी वंदिता राणा के निर्देशन व डीएसपी हर्षित शर्मा के सुपरविजन में की गई इस कार्रवाई में थानाधिकारी कुसुमलता मीणा, हैड कॉन्स्टेबल मदनलाल मीणा, कॉन्स्टेबल राकेश यादव, नीरज सिंह और पुखराज ने अहम भूमिका निभाई।


