बुरहानपुर जिले में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में दो आरोपियों, फकीरा पिता फत्तु और सिराज तड़वी पिता इब्राहीम, निवासी बिरोदा, के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी हर्ष सिंह ने पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार पाटीदार के प्रतिवेदन के आधार पर यह आदेश जारी किए। दोनों आरोपी पहले से ही जेल में बंद हैं। यह कार्रवाई 29 नवंबर को ग्राम बिरोदा में हुई एक घटना से संबंधित है। उस दिन अज्ञात आरोपियों ने एक धार्मिक संरचना को क्षतिग्रस्त कर हिंदू धर्म की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। भारत पिता पांडुरंग चौधरी की शिकायत पर लालबाग थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने खेतों में सिंचाई के उपकरणों और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया था। इस संबंध में उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार पाटीदार ने बताया कि गांव की सामाजिक और सांप्रदायिक स्थिति को देखते हुए आरोपियों का यह कृत्य एक बड़ी सांप्रदायिक घटना का रूप ले सकता था, जिससे अशांति फैलने की आशंका थी। उनके आपराधिक कृत्यों के कारण लोक शांति व्यवस्था खतरे में पड़ सकती थी। एसपी पाटीदार ने कहा कि आरोपियों का स्वतंत्र रहना राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी आधार पर उनके प्रतिवेदन पर कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी हर्ष सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई एक संदेश है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ एनएसए और इससे भी गंभीर कार्रवाई की जाएगी। क्या होती है एनएसए की कार्रवाई
दरअसल एनएसए की कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत होती है। इसके तहत देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का खतरा महसूस होने पर कार्रवाई होती है। जिस पर भी यह कार्रवाई होती है उस आरोपी को एक साल तक जेल में ही रखा जाता है। एक साल तक उसकी जमानत भी नहीं हो पाती।


