गोटन में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे:गांव की आबादी भूमि का डिजिटल नक्शा तैयार, ग्रामीणों को मिलेगा मालिकाना हक का लाभ

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के तहत मंगलवार को गोटन क्षेत्र में भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने ड्रोन सर्वे का कार्य शुरू किया। ड्रोन की मदद से गांव की आबादी क्षेत्र का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर ग्रामीणों को उनकी आवासीय संपत्तियों के डिजिटल पट्टे जारी किए जाएंगे। राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग द्वारा आबादी भूमि के डिजिटलाईजेशन कार्यक्रम को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। इसके तहत राज्य के 269 पंचायतों के लगभग 1800 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। ड्रोन सर्वे से क्या बदलेगा? — मिलेगा मालिकाना हक डिजिटल नक्शा तैयार होने के बाद ग्राम पंचायतें प्रत्येक भूखंड तथा घर की बाहरी सीमा का सत्यापन करेंगी और कब्जाधारी लोगों से स्वामित्व के दस्तावेज मंगवाए जाएँगे। आपत्तियाँ आमंत्रित करने के बाद योग्य लोगों को डिजिटल पक्का पट्टा जारी किया जाएगा। एक प्रति पीडीएफ रूप में भी उपलब्ध करवाई जाएगी। स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिलेंगे तीन बड़े लाभ 1. आवासीय संपत्तियों का मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे।
2. डिजिटल रिकॉर्ड और स्पष्ट सीमा निर्धारण से अवैध कब्जे व आपसी विवाद समाप्त होंगे, न्यायालयों में लंबित मामलों का भी निपटारा आसान होगा।
3. ग्राम पंचायत में आबादी क्षेत्र का डिजिटल मानचित्र उपलब्ध होने से विकास कार्यों को गति मिलेगी और भवन निर्माण के लिए परमिट जारी करना सरल होगा। ड्रोन सर्तवे कनीक से होगा सटीक रिकार्ड ड्रोन सर्वे से तैयार होने वाले डिजिटल मानचित्र से गांव के प्रत्येक भूखंड की सटीक लोकेशन, सीमा और आकार दर्ज होगा। इससे भविष्य में गांवों में वसूली, भवन निर्माण, परमिट जारी करने और कब्जे समाप्त करवाने में बड़ी सहायता मिलेगी। गोटन में सर्वे शुरू, अधिकारी रहे मौजूद गोटन में ड्रोन उड़ान शुरू होते ही ग्रामीणों में उत्सुकता देखने को मिली। सर्वे के दौरान अतिरिक्त विकास अधिकारी बाबूलाल तालेपा, गोटन प्रशासक भंवरलाल जमेरिया, पटवारी सियाराम जाजड़ा, वीडीओ छोटूराम ढाका, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सर्वेयर कमलेश कुमार गर्ग, सहायक सर्वेयर मानसिंह गुर्जर एवं कुलदीप मीणा मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन सर्वे पूरा होने के बाद डिजिटल मानचित्र ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। ग्रामीणों ने कहा कि यह पहल वर्षों पुराने भूमि विवादों को खत्म कर मालिकाना हक सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

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