शहडोल के बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में सोमवार को 100 नव-प्रवेशित एमबीबीएस छात्रों का वाइट कोट एवं शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह छात्रों के चिकित्सा जगत में औपचारिक प्रवेश और उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। सभागार में संकाय सदस्यों, अभिभावकों और छात्रों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस अवसर पर डीन डॉ. गिरीश बी. रामटेके, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नागेन्द्र सिंह, डॉ. मितेश सिन्हा, डॉ. विक्रांत कबीरपंथी, डॉ. राजेश खरात सहित महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य मौजूद रहे। सभी ने छात्रों को चिकित्सा पेशे की जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित किया। डीन बोले- डॉक्टर का जीवन सेवा और सत्यनिष्ठा पर आधारित अपने संबोधन में डीन डॉ. रामटेके ने कहा कि चिकित्सा पेशा केवल एक करियर नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग है। उन्होंने छात्रों को बताया कि हिप्पोक्रेटिक ओथ और महर्षि चरक शपथ आजीवन पालन किए जाने वाले आदर्श हैं, न कि सिर्फ एक औपचारिकता। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक का जीवन सहानुभूति, सत्यनिष्ठा, अनुशासन और निरंतर सीखने पर आधारित होता है। छात्रों ने पहना वाइट कोट कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण वह क्षण था जब संकाय सदस्यों ने एक-एक कर 100 छात्रों को वाइट कोट पहनाया। छात्रों के चेहरे पर गर्व और उत्साह साफ नजर आया। इसके बाद सभी छात्रों ने सामूहिक रूप से हिप्पोक्रेटिक ओथ और महर्षि चरक शपथ का उच्चारण किया। उन्होंने रोगियों के सम्मान, गोपनीयता, सेवा भावना, नैतिक चिकित्सा पद्धतियों और कर्तव्यनिष्ठा का पालन करने का संकल्प लिया। वाइट कोट समारोह के साथ ही छात्रों की चिकित्सा शिक्षा यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। परिवारजनों और संकाय सदस्यों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


