भक्ति में समर्पण होता है, विकल्प नहीं

भास्कर संवाददाता| विदिशा भक्ति में समर्पण होता है, विकल्प नहीं। यह बात निर्यापक श्रमण संभव सागर महाराज ने प्रातः प्रवचन सभा में कही। उन्होंने कहा, भगवान और गुरु के प्रति जितना अनुराग होगा, परिणाम उतने ही निर्मल होंगे। कर्म अपने आप दूर होते जाएंगे। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया, मुनि श्री के प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9 बजे श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में हो रहे हैं। मुनि श्री ने कहा, जिनसे राग होता है, उनसे कोई शिकवा नहीं होता। उन्होंने 1975 की फिरोजाबाद की नसियां का संस्मरण सुनाया। बताया, जब आचार्य विद्यासागर महाराज वहां पहुंचे, तब वे नए साधु थे। कोई उन्हें जानता नहीं था। नसियां के मैनेजर ने सेठ छदामीलाल को बताया कि एक युवा आचार्य आए हैं। सेठजी चिंतित हो गए कि चातुर्मास का समय है, यदि रुक गए तो क्या होगा। जब उन्हें पता चला कि यह चतुर्थ कालीन चर्या के धारी आचार्य विद्यासागर महाराज हैं, तो वे प्रोफेसर नरेंद्र प्रकाश के साथ पहुंचे। गुरुदेव की चर्या देखी। प्रभावित होकर चातुर्मास के लिए निवेदन किया। चातुर्मास प्रारंभ हुआ। प्रवचनों से प्रभावित होकर पंडाल छोटे पड़ने लगे। गुरुदेव की प्रभावना पूरे फिरोजाबाद में फैल गई। चार महीने बीते, लेकिन सेठ छदामीलाल को पड़गाहन नहीं मिला। वे प्रतिदिन पहले दिन से ही खड़े होते थे। गुरुदेव मुस्कुराते हुए निकल जाते। तीन महीने बीत गए, फिर भी सेठजी व्याकुल नहीं हुए। दीपावली के दिन, भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक महोत्सव पर उन्हें पड़गाहन मिला। उन्होंने गुरुदेव को आहार कराया। आज दो-तीन दिन में ही धैर्य टूट जाता है मुनि श्री ने कहा, आज दो-तीन दिन में ही लोगों का धैर्य टूट जाता है। गुरु पर आरोप लगाने से भी नहीं चूकते। कहते हैं, महाराज तो पहचान कर जाते हैं। लेकिन सेठजी पहले दिन से खड़े रहे। न कोई व्याकुलता, न कोई शिकायत। यही है परिणामों की निर्मलता और भक्त की परीक्षा। मुनिश्री ने कहा, णमोकार महामंत्र सभी समस्याओं का टूल है। जब भी कोई समस्या आए, इसका स्मरण करें। यह किसी भी समय, किसी भी हालत में पढ़ा जा सकता है। मुनि श्री ने बताया, षठखंडागम ग्रंथ को भगवान की दिव्य ध्वनि का अंग माना गया है। इसमें आचार्य पुष्पदंत ने सबसे पहले णमोकार महामंत्र लिखा। विनाश जैन विद्यावाणी ने बताया, कार्यक्रम की संयोजना समग्र पाठशाला समिति कर रही है। मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज प्रवचन के अंत में प्रश्नमंच का आयोजन करते हैं। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कार मिल रहा है।

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