भास्कर संवाददाता | रायसेन पठारी के पास बमोरी गांव में तीन मजदूर परिवारों को बंधक बनाकर काम करवाए जाने की शिकायत पर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। जनसुनवाई में एनजीओ कार्यकर्ता ममता दुबे द्वारा मामला कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा के संज्ञान में लाए जाने के बाद प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजा गया। रात 8 बजे जांच में तथ्य सही पाए जाने पर मजदूर परिवारों को ठेकेदार के कब्जे से मुक्त कराया गया। एसडीएम मनीष शर्मा, डिप्टी कलेक्टर अलका सिंह, कोतवाली थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल और श्रम अधिकारी मौके पर पहुंचे।मजदूरों के बयान दर्ज किए। एसडीएम मनीष शर्मा ने बताया कि शहाबुद्दीन खान नामक व्यक्ति तीनों मजदूर परिवारों को दूसरे स्थान से अनुबंध पर यहां लाया था। जानकारी मिली कि वह उनके पुराने उधारी के पैसे चुकता करने लाया था। तब से उन्हें बमोरी में काम कराया जा रहा था। मजदूरों से अधिक घंटे काम करवाए जाने की बात भी जांच में सामने आई। मजदूरों की आवाजाही पर रोक नहीं थी हालांकि मजदूरों की आवाजाही पर रोक नहीं थी और रहने के लिए कमरे भी दिए गए थे, लेकिन परिस्थितियों को बंधुआ मजदूरी की श्रेणी में आने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। तीनों परिवारों को सुरक्षित मुक्त कराकर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। अब उन्हें उनके मूल गांव भेजने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी तरह की बंधुआ मजदूरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


