वसी अहमद खान | डंडई प्रखंड के अधिकतर विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। प्रखंड में फिलहाल 70 विद्यालय एवं 1 मदरसा यानी कुल 71 सरकारी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमे वर्ग एक से लेकर वर्ग 5 तक 7798 बच्चे नामांकित हैं। वहीं 6 से लेकर 8 तक 3799 बच्चों ने नामांकन ले रखा है। कुल नामांकित बच्चों कि संख्या 11597 है। वहीं प्रखंड में कुल सरकारी शिक्षक 48 एवं पारा शिक्षक यानी अब सहायक शिक्षक लगभग 163 हैं। इसमें से भी कई सहायक शिक्षकों का सहायक आचार्य के पद पर सलेक्शन हो गया है। ऐसे में शिक्षकों का आंकड़ा और भी कम हो गया है। इधर राइट टू एजुकेशन के तहत छात्र/शिक्षक का अनुपात 30 बच्चों पर एक शिक्षक का है लेकिन प्रखंड में यह अनुपात 60:1 का हो गया है। ऐसे में बच्चों का भविष्य सुधारने का दावा शिक्षा विभाग में फेल होता नजर आ रहा है। सबसे ताजा उदाहरण प्रखंड के रारो पंचायत स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पथलाही टोला रारो का है। उक्त विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं हैं। उक्त विद्यालय इन दिनों गंभीर शैक्षणिक संकट से जूझ रहा है। शिक्षा के अधिकार के युग में बच्चों को पढ़ाई से वंचित होना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आशीष यादव ने इस संबंध में प्रखंड संसाधन केंद्र से तुरंत शिक्षक भेजने की मांग की है, ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। एकमात्र शिक्षक के चले जाने के बाद बढ़ी समस्या : गौरतलब रहे कि प्राथमिक विद्यालय पथलाही टोला रारो में कुल नामांकित बच्चों की संख्या 92 है। उक्त प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक मनोज कुमार पांडेय पदस्थापित थे। लेकिन हाल ही में उनकी नियुक्ति सहायक आचार्य के रूप में हो गई। जिसके बाद वे पलामू के दूसरे विद्यालय में सेवा चले गए। उनके जाते ही विद्यालय पूरी तरह शिक्षक-विहीन हो गया। इधर शुरू में 2-3 दिनों तक बीआरसी की ओर से अस्थायी रूप से शिक्षक भेजे गए, लेकिन बाद में यह व्यवस्था भी बंद हो गई। इसके कारण न तो बच्चों की कक्षाएं संचालित हो पा रहीं हैं और न ही विद्यालय का नियमित संचालन हो रहा है। शिक्षक न होने के कारण बच्चों कि पढ़ाई बाधित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चे विद्यालय पहुंचते तो हैं, मगर कक्षा संचालन नहीं होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। कई बच्चे स्कूल के परिसर में खेलकर समय व्यतीत कर रहे हैं। जबकि कई ने स्कूल जाना ही कम कर दिया है। ग्रामीणों में आक्रोश, समाधान की राह देख रहे : गांव में इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि विद्यालयों में शिक्षक की कमी कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन प्राथमिक विद्यालय जैसे बुनियादी संस्थानों का इस तरह होना बेहद चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो वे सामूहिक रूप से बीआरसी और प्रखंड मुख्यालय जाकर प्रदर्शन करेंगे। बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर प्रभाव : उक्त विद्यालय की पांचवी की छात्रा ज्योति कुमारी ने बताया कि फिलहाल एक सप्ताह से एक भी शिक्षक विद्यालय में नहीं आ रहे हैं। छात्र अमित कुमार ने बताया कि विद्यालय में कोई भी शिक्षक के नहीं आने से पढ़ाई बाधित हो रही है। सूर्य प्रकाश यादव, आदर्श सिंह, प्रकाश कुमार सहित अन्य छात्रों ने बताया कि खेती-बाड़ी का समय होने के कारण अभिभावक बड़ी मुश्किल से स्कूल जाने देते हैं। ऐसे में जब हम लोग स्कूल पहुंचते हैं तो शिक्षक को नहीं देखकर मन उदास हो जाता है। हम लोग यही सोचते हैं कि आज भी पढ़ाई नहीं होगी। सिर्फ मध्यान भोजन खाकर वापस चले जाएंगे। कई बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे पहली से पांचवीं तक पढ़ते हैं, लेकिन नियमित कक्षाओं के अभाव में वे पिछड़ते जा रहे हैं। परीक्षा नजदीक आने के बावजूद भी बच्चों को पढ़ाई का माहौल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कुछ बच्चे स्कूल जाते हैं और मध्याह्न भोजन कर वापस लौट आते हैं। स्कूल में उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। शिक्षा प्रेमियों का भी कहना है कि प्राथमिक स्तर पर निरंतर पढ़ाई बेहद जरूरी होती है। क्योंकि इसी नींव पर आगे की शिक्षा आधारित होती है। शिक्षक न होना बच्चों की सीखने की क्षमता पर गहरा प्रभाव डालता है। मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि विद्यालय में बहुत जल्द स्थाई शिक्षक भेजा जाएगा।


