धुरकी के प्रभारी चिकित्सक ने थाने में दर्ज कराई प्राथमिक, जांच धीमी

थाना प्रभारी जनार्दन राउत ने पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल प्रभारी द्वारा दिए गए आवेदन में दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों का उल्लेख किया गया है। आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही इस मामले को साइबर थाना को भी भेजा गया है, क्योंकि तकनीकी और अंतरराज्यीय पहलुओं की जांच आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी आवश्यक दस्तावेज़, ऑनलाइन रिकॉर्ड, अस्पताल रजिस्टर, लॉगिन डेटा और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि पिछले कुछ महीनों में जन्म प्रमाणपत्रों की संख्या अत्यधिक बढ़ी थी, जो सामान्य परिस्थितियों से मेल नहीं खाती। इससे प्रारंभिक तौर पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्य किसी संगठित गिरोह या बाहरी तकनीकी मदद से किया गया है। सितंबर से नवंबर के बी सबसे ज्यादा प्रविष्टियां : सूत्रों की मानें तो सितंबर से नवंबर के बीच बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, जिनमें कई प्रविष्टियां संदेहास्पद पाई गई हैं। ऐसे कई मामलों के दस्तावेजों में नाम, पता और जन्म की तारीखें किसी अन्य जिले या राज्य से मेल खा रही हैं, जो स्थानीय अस्पताल के रिकॉर्ड से संगत नहीं हैं। अस्पताल के प्रभारी ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उन्हें इस बात का संदेह है कि अस्पताल सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश कर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए गए होंगे। चूंकि ओटीपी किसी बाहरी मोबाइल नंबर पर जा रहा था, इसलिए फर्जीवाड़े का दायरा काफी बड़ा माना जा रहा है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कहा जांच को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज़ का दुरुपयोग एक बड़ा अपराध है। दोषियों की पहचान होते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भास्कर न्यूज | गढ़वा धुरकी अस्पताल में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र निर्गत किए जाने के मामले में 20 दिनों से जांच के नाम पर टाल-मटोल हो रहा है। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। बढ़ते संदेह, जांच टीम की देरी और असंगत रिपोर्टों के बीच आखिरकार धुरकी अस्पताल के प्रभारी डॉ. रत्नेश कुमार ने सोमवार को स्थानीय थाने में प्राथमिकी के लिए लिखित आवेदन दिया। इसके बाद मामले में जांच की गति अभी भी सुस्त है। जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की ऑनलाइन प्रक्रिया में दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के उपयोग की पुष्टि हुई है। ये नंबर उन ओटीपी को प्राप्त करते थे जिनके आधार पर जन्म प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। जांच के दौरान पाया गया कि इनमें से एक मोबाइल नंबर आंध्र प्रदेश का है, जबकि दूसरा स्थानीय स्तर पर सक्रिय नहीं पाया गया। इससे पूरे मामले में साइबर क्राइम की आशंका और गहरी हो गई है।

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