सुनील उमरवाल | खरगोन यदि सरकारी पैसों की बर्बादी को देखना है तो जुलवानिया-सिनखेड़ा मार्ग स्थित नगर वन घूम आइए। यहां की स्थिति खुद ब खुद इसकी कहानी बयां कर देगी। तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच लोगों को प्रकृति व पर्यावरण के करीब लाने के लिए वन विभाग ने 2024 में 73 लाख रुपए खर्च कर 27 हेक्टेयर में नगर वन विकसित किया था। पांच हजार छायादार व फलदार पौधों के साथ ही नक्षत्र वाटिका व औषधीय पौधे भी लगाए गए थे। निर्माण के समय बड़े-बड़े दावे भी किए थे कि यह लोगों के लिए पिकनिक स्पॉट बनेगा। लोगों के घूमने के लिए ट्रैक, अलग-अलग हिस्सों में बैठने के लिए कुर्सियां व बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व अन्य संसाधन भी लगाए गए, लेकिन अफसरों की अनदेखी के चलते यहां लगाए गए अधिकांश पौधे सूख चुके है और पूरा परिसर चारागाह में तब्दील हो चुका है। इससे यह राशि फिजूलखर्ची साबित होने लगी है। हालांकि अफसर दावा कर रहे है कि सूखे पौधे बारिश में ही बदले थे। अधिकांश पौधे जीवित है। वैसे भी कैजुअल्टी का प्रावधान होता है। रमेश राठौर, डीएफओ स्पॉट-1 : इक्का-दुक्का नहीं कई डंठल में तब्दील नगर वन से घुसते ही झूलों के आसपास से लेकर पिछले हिस्से तक एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह खाली है। यहां विभाग ने नीम, करंज, सीताफल, आंवला, बहेड़ा, गुलमोहर, अर्जुन आदि लगाने का दावा किया था, उनमें से एक भी कतार सही हालत में नहीं है। अधिकांश पौधे झुलस गए और अब डंठल ही बचे है। राशि वाटिका में जरूर इन दिनों पानी देने से पौधे हरे-भरे बने हुए है। स्पॉट-2 : घूमने के लिए बनाए ट्रैक घास से घिरे नगर वन में नाले वाले हिस्से की तरफ तो ट्रैक खुद जंगली घास में घिर गया है। जहां-जहा पौधे लगाए थे, वहां जंगली घास की भरमार है। तार फेंसिंग भी जगह-जगह से टूटी हुई है। फेंस के पास ताजा पैरों के निशान साफ दिख रहे, जिससे पता चला कि मवेशी आसानी से भीतर आकर पौधे खा रहे हैं। जबकि चौकीदार के लिए यहां बिल्डिंग समेत अन्य सुविधाएं भी जुटाई गई थी। Q. नगर वन में पिकनिक स्पॉट तैयार कर लगाए पौधे सूख चुके हैं? A. ऐसा नहीं है। आप कब गए थे। कई पौधे हमने बारिश में ही बदलवाए थे। Q. पिकनिक स्पॉट तो पूरा चारागाह में तब्दील हो चुका है? A. जंगल का इलाका होने से यह स्थिति बनी। सफाई करवा रहे है। Q. जो सुविधाएं जुटाई थी, ये भी खराब स्थिति में आ गई? A. नहीं ऐसा नहीं है। कुछ टूट फूट तो होती रहती है। Q. इस प्रोजेक्ट के नाम पर यह कहीं यह फिजूलखर्च तो नहीं किया? A. ऐसा नहीं है, जो पौधे लगाए गए है तो उनकी देखभाल कर बड़े भी किए जाते है। कुछ पौधों की कैजुअल्टी का प्रावधान रहता है।


