लखनऊ में बाघ चौथी बार ट्रैप कैमरे में कैद:मचान के पास तक आया, वन विभाग की टीम पकड़ नहीं पाई

लखनऊ में सोमवार को चौथी बार बाघ फोटो ट्रैप कैमरे में कैद हुआ। यहां से मचान की दूरी महज 10 मीटर थी। इसके बाद भी वन विभाग की टीम बाघ को ट्रेंकुलाइज नहीं कर पाई। DFO सितांशु पांडेय ने बताया कि केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) परिसर के ब्लॉक-4 में लगाए गए फोटो ट्रैप कैमरे में सुबह साढ़े 7 बजे बाघ कैद हुआ। कोहरा होने और लो विजिबिलिटी के चलते पास में ही मचान पर बैठी टीम बाघ को ट्रेंकुलाइज नहीं कर पाई। सुलोचना और डायना ने शुरू की तलाश इधर, हथिनी सुलोचना और डायना ने बाघ की तलाशी शुरू की। बाघ दिखाई दिया और वन विभाग की टीम ने नेट लगाकर हाथिनियों के साथ घेरा, लेकिन बाघ बच निकला। इससे पहले सुबह करीब 8 बजे बाघ ने एक पड़वा को मारकर साथ उठा ले गया था। टाइगर को पकड़ने के लिए अब वन विभाग की टीम ने नई प्लानिंग की है। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार से लाउड स्पीकर से बाघिन की दहाड़ से बाघ को आकर्षित करने का काम किया जाएगा। इससे बाघ मेटिंग के इरादे से आवाज तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इतना ही नहीं, दुधवा नेशनल पार्क से बाघिन का पेशाब भी मंगाया गया है, जिसे पिंजरे में डाला गया है। साथ ही दोनों हथिनियां सुबह-शाम बाघ के पग चिह्नों के सहारे कॉम्बिंग कर रही हैं। लाउड स्पीकर से सुनाई जाएगी बाघिन की दहाड़
DFO ने बताया कि बाघ की घेराबंदी करने व बाघ को एक जगह स्थिर करने के लिए मादा बाघ की आवाज की रिकॉर्डिंग को बड़े लाउड स्पीकर के जरिए संस्थान के अंदर सुनाया जाएगा। बाघिन की आवाज सुनकर बाघ मेटिंग के लिए आकर्षित होकर जंगल में ही ठहर जाएगा। दुधवा के जंगल से मादा बाघ की पेशाब मंगाई गई
DFO डॉ सितांशु पांडेय ने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क से मादा बाघ की पेशाब मंगवाई गई है। इसको पिंजरे में डाला गया है। मादा की पेशाब से बाघ आकर्षित होकर आएगा। इसके बाद वन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से बाघ को ट्रैंकुलाइज कर सकते हैं। 2012 में भी इसी तकनीक का प्रयोग किया गया था। पिंजरे में ट्रैंकुलाइज करने की तैयारी
बाघ को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे के बाहर पड़वे को बांधा जाएगा। पिंजरे को केमोफ्लाइज करके अंदर विशेषज्ञ डॉक्टर बैठेंगे, ताकि सुरक्षित रहते हुए पिंजरे के अंदर से बाघ को ट्रैंकुलाइज कर रेस्क्यू किया जा सके। पुराने पद चिह्नों के सहारे की जा रही तलाश
दोनों हथिनी विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ बाघ के संभावित इलाके में कॉम्बिंग कर रही हैं। माना जाता है, कि बाघ अक्सर मीठे नगर की तरफ जगलों से ही आता-जाता है। इसी क्षेत्र में बाघ ने 21 दिसंबर को सांड का शिकार किया था। मीठे नगर पुलिया के नीचे दाईं तरफ 25 दिसंबर को बाघ ने जंगली सुअर को मारा था। कोहरे की वजह से सुबह 10 बजे शुरू हुई कॉम्बिंग
सोमवार सुबह घने कोहरे की वजह से दोनों हथिनियों ने सुबह 10 बजे से कॉम्बिंग शुरू की। सुलोचना व डायना को महावत व विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मीठे नगर जाने वाले मार्ग के आस पास बने पैच में कॉम्बिंग कराई जा रही है। करीब 2 घंटे की कॉम्बिंग के बाद हथिनियां वापस लौट गईं। …………………………………… यह भी पढ़ें लखनऊ में बाघ के पैरों के नए निशान मिले:शाम 4 बजे तक हथिनी सुलोचना-डायना ने की कॉम्बिंग; सुबह किया था गौवंश का शिकार लखनऊ के रहमानखेड़ा में बाघ की दहशत बरकरार है। रविवार सुबह मंडौली गांव में एक गौवंश का शिकार किया। वहीं मीठे नगर गांव जाने वाले मार्ग के बाएं तरफ स्थित मजार, तालाब एवं नाले के आस-पास पैरों के नए निशान मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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