विशेष संवाददाता | रांची शिव महापुराण का पाठ करना और उसको सुनना दोनों ही महान यज्ञ है। इसे सद्गति प्रदान करने वाला कहा गया है। सात संहिताओं संयुक्त महाशिवपुराण का जो भी संपूर्ण पाठ करता है उसे मोक्ष मिलता है। देवराज जैसे पापी ने भी शिव की कथा सुनकर शिव लोक की प्राप्ति कर ली। शिव महापुराण में बिंदुक और चंचुला की कथा एक महत्वपूर्ण प्रसंग है, जो बताता है कि कैसे एक पति-पत्नी शिव भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करते हैं। चंचुला की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा शिवलोक जाती है, जहां पार्वती जी शिव से उपदेशों के लिए क्षमा और मुक्ति की प्रार्थना करती हैं, क्योंकि उसने अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए गलत मार्ग अपनाया था और अंततः शिव कृपा से दोनों को गति मिलती है यह संसारिक मोहमाया से ऊपर उठकर भक्ति के महत्व को दर्शाता है। महान पापी बिंदुक और चंचुला भी शिव महापुराण सुनकर पाप मुक्त हो गए। तात्पर्य यह है कि महाशिवपुराण को सुनने के बाद मानव भाव बंधनों से मुक्त हो जाता है। इसलिए एक शिव पुराण को ही सुनना चाहिए। यह कथा शिव पुराण की रूद्र संहिता में मिलती है और भक्तों को जीवन में धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह कहानी वैवाहिक जीवन में प्रेम निष्ठा और आध्यात्मिक उन्नति के महत्व पर जोर देती है और यह सिखाती है कि कैसे संसारिक आसक्तियों को त्याग कर शिव भक्ति से मुक्ति मिल सकती है। ये बातें चित्रकूटधाम उत्तर प्रदेश से आए प्रख्यात महाशिवपुराण कथावाचक आचार्य प्रिया प्रियतम दास महाराज ने मंगलवार को द्वारकाधीश धाम मंदिर में शुरू हुए नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ में कही। मुख्य यजमान शारदा देवी और अरुण गुप्ता ने गणेश पूजन किया। बुधवार के प्रसंग में शिव महापुराण की विधि वर्णन और आदि शिवलिंग पूजन महत्व की कथा होगी। मौके पर दशरथी दास, महाराज, केशव दास महाराज, द्वारकाधीश मंदिर के मुख्य प्रभारी महंत अमर दास, श्री चित्रकूटधाम से आए आचार्य कृष्णकांत द्विवेदी, शैलेंद्र द्विवेदी, कौशल चौधरी, मुनी शर्मा, जय राम साहू, मंदिर के पुजारी श्याम विजय रामानंदी, जगदीश कुमार, अजय मिश्रा, रवि कुमार विशेष रूप से शामिल हुए। चित्रकूटधाम से आए कथावाचक आचार्य प्रिया प्रियतम दास प्राचीन द्वारकाधीश धाम मंदिर में शिव महापुराण कथा में उपस्थित श्रद्धालु।


