MP में आवारा मवेशियों का संकट:रीवा में सबसे ज्यादा 82 हजार पशु सड़कों पर; प्रदेश में आंकड़ा 8.5 लाख पार, खेती-किसानी चौपट

रीवा जिले में गौशालाओं और अभयारण्यों के दावों के बावजूद बेसहारा मवेशियों की समस्या विकराल हो गई है। हाल ही में विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में बेसहारा मवेशियों की संख्या 8.53 लाख से ज्यादा है, जिसमें रीवा जिला 82,428 पशुओं के साथ पूरे प्रदेश में पहले नंबर पर है। ये मवेशी भूख-प्यास से जूझते हुए सड़कों पर हादसों और खेतों में फसल बर्बादी का कारण बन रहे हैं। रीवा शहर से लेकर गांवों तक हालात खराब हैं। नेशनल हाईवे और प्रमुख सड़कों पर मवेशियों के झुंड के कारण अक्सर जाम लगता है और दुर्घटनाएं होती हैं। अचानक मवेशियों के सामने आने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। पिछले एक दशक से जिले के लोग और वाहन चालक इस समस्या से जूझ रहे हैं। विंध्य में हालात चिंताजनक, सतना दूसरे नंबर पर सरकारी आंकड़ों ने विंध्य क्षेत्र की स्थिति को उजागर किया है। रीवा के बाद सतना जिले में 61,626 बेसहारा मवेशी हैं। वहीं, सीधी में 6,688 और सिंगरौली में 3,776 मवेशी दर्ज किए गए हैं। इन जिलों की तुलना में रीवा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। 110 गौशालाएं और 2 अभयारण्य भी नाकाफी रोकथाम के लिए जिले में दो गौ अभयारण्य बनाए गए हैं। इसके अलावा पंचायत स्तर पर 110 गौशालाओं का निर्माण भी पूरा हो चुका है। इसके बावजूद सड़कों पर मवेशियों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। ग्रामीण इलाकों में किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में जन-सुरक्षा खतरे में है। कलेक्टर बोलीं- क्षमता बढ़ाकर शिफ्ट करेंगे कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि बेसहारा मवेशियों की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने, मवेशियों को वहां शिफ्ट करने और पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से बेसहारा मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है।

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