यमुना शुद्धिकरण एवं राष्ट्रीय नदी घोषित कराने की मांग को लेकर मथुरा में यमुना भक्तों द्वारा को पहली बार दंडवत परिक्रमा प्रारंभ कर दी है। यात्रा प्रारंभ होने के अवसर पर गोपाल पीठाधीश्वर श्री श्री 108 डॉ. पुरुषोत्तम लाल जी महाराज ने कहा कि चार युगों से प्रतिक्षित महान पुण्य कार्य को प्रभु गोपाल जी, बिहारी जी सहज पूर्ण करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने मथुरा पुरी के चार युगों का वर्णन करते हुए कहा की मां यमुना को राष्ट्रीय नदी का सम्मान लेने के लिए हम हर प्रयास करेंगे सनातन राष्ट्र में अगर मां यमुना को भी यह सम्मान नहीं मिलेगा तो फिर उनका राष्ट्रगान में नाम होने से क्या फायदा। पहली बार हो रही यात्रा पहली बार की जा रही यमुना की दंडवती परिक्रमा गोपाल पीठ से विश्राम घाट, स्वामी घाट ,चौक बाजार, लाल दरवाजा, अमरीश टीला, गायत्री तपोभूमि ,गणेश टीला,बिरला मंदिर, अक्रूर घाट, पागल बाबा मंदिर, वृंदावन नगर पालिका, कात्यानी मंदिर, होते हुए तटीय स्थान पर तीन दिवस का विराम लेगी। इसके बाद पानी घाट पुल से होते हुए पानी गांव ,डेरवा, दुर्वासा ऋषि क्षेत्र बृहद वन होते हुए विश्राम घाट के सामने चतुर्वेदी समाज यज्ञ भूमि पर दो दिवस का प्रवास रहेगा। उसके बाद दंडवती परिक्रमा नए पुल ध्रुव टीला ,बली टीला, आर्य समाज रोड होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचकर पूरी होगी। यात्रा लगभग 41 किलोमीटर की होगी। जिसमें एक माह समय लगेगा। विश्राम घाट पहुंची यात्रा दंडवती परिक्रमा के पहले दिन यमुना भक्त मुकेश बाल कृष्ण एवं गोपाल भक्त सुखदेव चतुर्वेदी ने अपने गुरु को शाल एवं फूलों का हार आदि से पूजन कर प्रथम प्रणाम किया। इसी के साथ मां यमुना की दंडवती परिक्रमा प्रारंभ कर दी। इस अवसर पर गोपाल पीठ के पीठाचार्य भूरा बाबा ने दुपट्टा प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया। यह रहे मौजूद इस अवसर पर प्रमुख रूप से गोपाल बाबा,लाल बाबा , हलदर बाबा ने सभी को बाल भोग – चंदन प्रसाद दंडवती करने वाले भक्तों को प्रदान कर परिक्रमा आनंद में होने का आशीर्वाद दिया। इस दौरान दीर्घ विष्णु के महंत कांता नाथ महाराज, महेश लड्डू चतुर्वेदी,पूर्व पार्षद रामदास चतुर्वेदी , अतुल चतुर्वेदी चंद्र मोहन चतुर्वेदी, तिलक दास आदि ने दंडवती परिक्रमा कर रहे भक्तों को प्रथम पड़ाव तक ट्रैफिक से बचाते हुए पूरे दिन सेवा दी।सुभाष चतुर्वेदी,बाली चतुर्वेदी सुभाष चतुर्वेदी एडवोकेट, बंसी चतुर्वेदी, नरेंद्र चतुर्वेदी आदि यमुना भक्तों ने सभी का हार-दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया।प्रथम दिवस यात्रा ने पड़ाव विश्राम घाट पर लिया।


