स्वामी विवेकानंद सरोवर (बड़ा तालाब) को संवारने और स्वच्छ बनाने पर 40 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। झारखंड हाईकोर्ट की फटकार के बाद 8.20 करोड़ की लागत से बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को शुरू कर दिया गया है। नगर निगम के अफसरों ने हाईकोर्ट को बताया है कि अपर बाजार क्षेत्र से आने वाले सभी नालों के गंदे पानी को एसटीपी में ट्रैप किया जा रहा है। उसे रिसाइकिल करके तालाब में छोड़ा जा रहा है। लेकिन, ये तस्वीर नगर निगम के दावों के साथ स्वामी विवेकानंद सरोवर की स्वच्छता पर सवाल खड़े करते हैं। क्योंकि, एसटीपी बनाने वाली कंपनी ने सेवा सदन अस्पताल के बगल से आ रही नाली के गंदे पानी को सीधे तालाब में बहाना शुरू कर दिया है। तालाब और एसटीपी से निकले पानी का रंग एक जैसा है। एसटीपी को बाइपास करके नाले के पानी को तालाब में जाने से रोकने के लिए लगाए गए गेट को करीब चार इंच खोल दिया है। इससे नाले का गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा रहा है। गंदे पानी से इतना अधिक झाग उठ रहा है, जिसे देखकर ऐसा लगा रहा मानो बर्फ की चट्टान तालाब के ऊपर रख दी गई हो। तालाब में गंदे पानी के जमा होने से दुर्गंध उठ रही है। इससे तालाब के पास से गुजरना मुश्किल हो गया है। बिजली खर्च बचाने का चल रहा खेल स्थानीय लोगों ने बताया कि एसटीपी तो बनाया गया है, पर यह नियमित रूप से नहीं चलता। ऐसे ही गेट खोलकर नाले का गंदा पानी सीधे तालाब में बहाया जाता है। एसटीपी चलने से बिजली की खपत होती है। बिजली का खर्च बचाने के लिए कंपनी ऐसा करती है। जब नगर निगम के पदाधिकारी निरीक्षण करने आते हैं तो उस समय एसटीपी को चलाकर दिखा दिया जाता है।


