स्टेट हाईवे क्रमांक 18 पर थांदला-बदनावर और पेटलावद-रतलाम मार्ग की खराब स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। आधे घंटे का सफर अब एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो रहा है। यह मार्ग गुजरात और राजस्थान को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण लिंक है। यात्री और वाहन चालक इस बदहाल सड़क के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सड़क जर्जर होने के बावजूद इस मार्ग पर टोल टैक्स की वसूली जारी है, जबकि सड़क की मरम्मत या पेचवर्क नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब रास्ते से गुजरने पर वाहनों में भी टूट-फूट हो रही है और लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों की दिक्कतों को देखते हुए, पूर्व विधायक प्रतिनिधि आशीष मूथा ने हाल ही में एमपीआरडीसी के संभागीय प्रबंधक को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सड़क के तत्काल सुधार की मांग की गई है। पेटलावद से बदनावर तक की सड़क की दुर्दशा के बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 10 अप्रैल को बदनावर में एक घोषणा की थी। उन्होंने बदनावर-पेटलावद-टिमरवानी तक फोरलेन बनाने और इसे 8-लेन कनेक्टिविटी से जोड़ने की बात कही थी। इस परियोजना में 80 किलोमीटर लंबा यह मार्ग ₹1,900 करोड़ की अनुमानित लागत से बनेगा। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग 752-डी (NH 752-D) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस फोरलेन के निर्माण के लिए 155.579 हेक्टेयर निजी और सरकारी भूमि प्रस्तावित की गई है। थांदला से बदनावर तक फोरलेन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसे 2028 से पहले बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, फोरलेन का निर्माण एक सकारात्मक कदम है, लेकिन क्षेत्रवासियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2028 तक वे इस बदहाल और गड्ढों से भरी सड़क पर कैसे यात्रा करेंगे। यात्रियों का कहना है कि जब सरकार को टोल मिल रहा है, तो उन्हें तब तक चलने लायक सड़क प्रदान करना भी उसकी जिम्मेदारी है।


