कोटा शहर के किशोरपुरा इलाके में पेड़ के तने से निकली हनुमान प्रतिमा की पूजा अर्चना की जा रही है। रामद्वारा परिसर में जहां ये प्रतिमा नजर आई थी अभी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया गया है और बड़ी संख्या में लोग पूजन करने के लिए वहां आ रहे है। लोग इसे चमत्कार की तरह देख रहे हैं और अब इसी स्थान पर प्रतिमा को विराजकर मंदिर निर्माण की मांग भी उठने लगी है। इसके लिए एक समिति का गठन भी किया जा रहा है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में भक्त वहां पूजन करते नजर आए। दोपहर बारह बजे महाआरती का आयोजन किया गया। सुबह और शाम को महाआरती की जा रही है। आस पास फूल मालाओं और प्रसाद की दुकानें भी शुरू हो गई। गौरतलब है कि रविवार को रामद्वारा परिसर में कुछ बच्चे अलाव ताप रहे थे। इस दौरान वहां रखे पुराने बरगद के पेड़ के तने में आग लग गई। बच्चों को आग लगने के बाद तने से मूर्ति नजर आई। जिसके बाद उन्होंने आस पास के लोगों को जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद मौके पर इलाके के लोग इकट्ठा हो गए। प्रतिमा पत्थर की है जो करीब पांच फीट ऊंची है। पूजन कर रहे पं.सुरेन्द्र शास्त्री ने बताया कि यह कोटा के लिए सौभाग्य की बात है कि भगवान की प्रतिमा यहां अवतरित हुई है। यहां अब सुंदरकांड के आयोजन हो रहे है। अब समिति का गठन किया जा रहा है। अब निगम और प्रशासन से मांग है कि मंदिर को यहीं बनाया जाए। अगर प्रशासन या निगम कोई मदद नहीं करता तो भक्त लोग ही अपने स्तर पर मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक मदद जुटाएंगे। लेकिन मंदिर का निर्माण यहीं होगा।
वहीं पुरातत्व विभाग की टीम ने भी इसकी जांच की। प्रतिमा करीब 20वीं सदी की है और संभवतः किसी पुराने धार्मिक स्थल से लाई गई होगी, जो समय के साथ पेड़ के बीच फंस गई या तने की परतों में समा गई। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कई बार किसी पेड़ के पास रखी पत्थर या धातु की प्रतिमा धीरे-धीरे तने की बढ़ती मोटाई में समा जाती है। बरगद के पेड़ों में तना फैलने के साथ वस्तुओं को भीतर समेटने की क्षमता होती है। प्रारंभिक अनुमान है कि यही प्राकृतिक प्रक्रिया इस प्रतिमा के पेड़ में उभर आने का कारण बनी।


