इंदौर में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जिला प्रशासन ने 5,48,714 मतदाताओं के नाम हटाने (डिलीशन) का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं 1,48,682 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे, जिन्हें नियमों के तहत दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने नाम की पुष्टि करनी होगी। विस्तृत जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सूची में दर्ज हैं, जो अब इंदौर में निवास नहीं करते या स्थायी रूप से अन्य शहरों में स्थानांतरित हो चुके हैं। कई लोग पता बदलकर कहीं और बस गए, जबकि काफी संख्या ऐसे लोगों की मिली जिनकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके अलावा मृत मतदाताओं के नाम भी सूची में बने होने के तथ्य सामने आए हैं। नोटिस भेजकर मांगे जाएंगे दस्तावेज प्रशासनिक कार्रवाई के तहत जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने का प्रस्ताव है, उनमें वे भी शामिल हैं जिनका नाम 2003 की सूची में था, लेकिन 2024-25 के चुनावों में शामिल नहीं पाए गए। ऐसे सभी नामों को हटाने से पहले नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगने की प्रक्रिया की जाएगी, ताकि योग्य मतदाता पुनः सूची में शामिल हो सकें। 11 जनवरी तक डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया, 16 से दावे-आपत्ति 11 दिसंबर तक डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। उसके बाद अनमैप्ड वोटरों को नोटिस जारी कर 16 दिसंबर से दावे-आपत्तियों की सुनवाई होगी। सुनवाई की इस प्रक्रिया के लिए सभी 9 विधानसभा क्षेत्रों में क्लस्टर बनाए जाएंगे। इंदौर जिले में लगभग 1 लाख 95 हजार मतदाता अनमैप्ड श्रेणी में रखे गए हैं। इन्हें नोटिस देकर दावे-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। लगभग 30 दिनों तक दावे-आपत्ति प्रस्तुत करने का समय रहेगा और उसके बाद सुनवाई होगी, जिसमें संबंधित मतदाता को आयोग द्वारा निर्धारित किए गए 12 में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। 11 से 15 दिसंबर तक सभी एईआरओ का प्रशिक्षण भी शुरू होगा। मांगे जाने वाले दस्तावेज में पहचान के साथ-साथ निवास प्रमाण भी देना होगा। किस कारण से कितने नाम हटेंगे इन्हीं सभी श्रेणियों को मिलाकर जिला प्रशासन ने कुल 5,48,714 नामों को मतदाता सूची से हटाने का प्रस्ताव तैयार किया है। नाम हटने के बाद क्या होगा
नियमों के अनुसार जिन लोगों के नाम हटेंगे वे भविष्य में मतदाता सूची में पुनः शामिल होने के लिए नया फॉर्म 6 भर सकेंगे या वैध पता प्रमाण, फोटो पहचान जमा कर फिर से पंजीयन करा सकेंगे। अब इस प्रक्रिया पर अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया जरूरी है, ताकि मतदाता सूची में सिर्फ वही लोग शामिल रहें, जो वास्तव में बूथ पर वोट देने के पात्र हैं। इससे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होगी और गलत प्रविष्टियों पर रोक लगेगी।


