ग्लोबल एडवाइजरी फर्म ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटोमोटिव सेक्टर में सिल्वर की डिमांड 2025 से 2031 तक हर साल 3.4% की दर से बढ़ेगी। इस डिमांड के चलते सिल्वर को अब नेक्स्ट जनरेशन मेटल कहा जा रहा है क्योंकि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल सिस्टम में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को सिल्वर का भाव रिकॉर्ड ₹1.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गया। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ग्रोथ से बढ़ेगी डिमांड 2024 में पेट्रोल-डीजल इंजन गाड़ियों में 55% और EV में 30% सिल्वर डिमांड थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2027 तक EV प्रोडक्शन ICE को ओवरटेक कर लेगा और 2031 तक ऑटो सेक्टर की 59% सिल्वर डिमांड EV से आएगी। इसकी वजह है कि EV में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स ज्यादा लगते हैं। हर EV में औसतन पेट्रोल-डीजल इंजन गाड़ियों से 2-3 गुना ज्यादा सिल्वर यूज होता है। अलग-अलग पावरट्रेन में सिल्वर यूज का बढ़ेगा ऑक्सफोर्ड ने कहा, हमारा अनुमान है कि 2025-2031 के बीच ग्लोबल सिल्वर डिमांड ऑटो इंडस्ट्री में 3.4% CAGR से बढ़ेगी। लेकिन कुछ अनिश्चितताएं भी हैं। अलग-अलग पावरट्रेन में सिल्वर यूज का रेंज बहुत बड़ा है। ऑटोनॉमस ड्राइविंग आएगी तो सेंसर और ECU ज्यादा लगेंगे, इससे भी डिमांड बढ़ेगी। लेकिन कई ECU को एक डोमेन कंट्रोल यूनिट में मर्ज करने की कोशिश डिमांड को सीमित कर सकती है। फिर भी EV ट्रांजिशन सबसे बड़ा ड्राइवर रहेगा। ग्रीन एनर्जी और डिजिटल में भी रोल ऑटो से हटकर भी सिल्वर की डिमांड बढ़ रही है। सबसे अच्छी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी की वजह से सोलर पैनल, डेटा सेंटर और EV चार्जिंग में यूज हो रहा है। सोलर पैनल में एनर्जी कन्वर्जन बढ़ाता है, डेटा सेंटर में डेटा प्रोसेसिंग तेज करता है और EV में फास्ट चार्जिंग-पावर ट्रांसमिशन में मदद करता है। ये खबर भी पढ़ें चांदी ₹1.86 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंची:इस साल ₹2 लाख तक जा सकती है, इसमें सिल्वर ETF के जरिए करें निवेश चांदी की कीमत 10 दिसंबर को 1.86 लाख रुपए किलो के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई है। इस साल अब तक चांदी करीब 1 लाख रुपए महंगी हो चुकी है, यानी इसकी कीमत 115% बढ़ चुकी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ रही है। जिससे चांदी इस साल 2 लाख रुपए के पार जा सकती है। पूरी खबर पढ़ें


