जो मृत्युशैया पर, उसे पहले मिलेंगे अंग, मंजूरी डीन देंगे प्रदेश में पहली बार अंगदान को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन बनाई गई है। अब ऑर्गन ट्रांसप्लांट में प्राथमिकता सिर्फ वेटिंग लिस्ट के आधार पर नहीं, बल्कि मरीज की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। यानी, जो मरीज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा होगा, उसे वेटिंग लिस्ट में ऊपर रखा जा सकता है। स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) ने नई गाइडलाइन जारी की है। हर अस्पताल को अपनी एक वेटिंग लिस्ट सोटो की बेवसाइट पर ऑनलाइन बनाकर तैयार करनी होगी। इसे उस शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज की डीन से सर्टिफाई कराना होगा। सभी मेडिकल कॉलेज में एक पद ऑर्गन डोनेशन वॉलेंटियर का होगा। ‘वन नेशन, वन पॉलिसी’ के तहत ये नियम जारी किए गए हैं। केंद्र और राज्य के नए नियमों के तहत, ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को आसान और त्वरित बनाने के लिए सुपर अर्जेंट लिस्ट पहली बार तय की है। अब तक प्रदेश में स्पष्ट नियम नहीं थे। स्थानीय निवासी होना जरूरी नहीं, दूसरे राज्य वाले भी करा सकेंगे पहली बार समयसीमा भी तय… दस्तावेज पूर्ण करने के लिए 10 दिन, कमियां सुधारने के लिए 7 दिन, साक्षात्कार के लिए 7 दिन का समय तय किया है। प्राधिकार समिति को अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकतम 24 घंटे का समय मिलेगा। पूरी प्रक्रिया 6 से 8 हफ्ते के भीतर पूरी होगी।


