मऊगंज जिला पुलिस बल ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को जीवनरक्षक सीपीआर की ट्रेनिंग दी। बुधवार यह प्रशिक्षण पुलिस कंट्रोल रूम में हुआ। जानी-मानी डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी और उनकी मेडिकल टीम ने कार्यशाला का संचालन किया। उन्होंने बताया कि तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ते हृदय रोग मामलों के कारण अचानक हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) की स्थितियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शुरुआती तीन से पांच मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिसमें सही सीपीआर से मरीज के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रशिक्षण के दौरान मेडिकल टीम ने डमी (पुतले) के माध्यम से सीपीआर देने की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों को छाती पर दबाव देने (चेस्ट कम्प्रेशन) की उचित गति, दबाव की गहराई, हाथों की स्थिति सहित ‘माउथ-टू-माउथ’ कृत्रिम श्वसन की सही विधि समझाई गई। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि पुलिस बल अक्सर दुर्घटनाओं और आपात घटनाओं के फर्स्ट रिस्पॉन्डर होते हैं। ऐसे में, घटनास्थल पर पहुंचकर वे एम्बुलेंस आने से पहले पीड़ित व्यक्ति को जीवनदान देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्रशिक्षण में सुबेदार अमित विश्वकर्मा सहित मऊगंज पुलिस के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने गंभीरता और उत्साह के साथ इस महत्वपूर्ण तकनीक को सीखा। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि मानव जीवन की रक्षा में भी और अधिक सक्षम बनाना था।


