एक जनवरी 2024 से लेकर पांच जनवरी 2025 तक नगर निगम ने कारों की बिक्री से 1 करोड़ 64 लाख रुपए कमाए हैं। जब एक कार की बिक्री होती है तो उससे 1000 रुपए काओ सैस के तौर पर निगम को मिलता है। उक्त अवधि के दौरान जालंधर में 16,949 कारों की बिक्री हुई है। वहीं दूसरी तरफ करीब 4000 दो पहिया वाहन भी बिके हैं। लेकिन प्रति वाहन का 500 रुपए सेस पंजाब सरकार के खाते में चला गया है। राज्य में साल 2016 में पहली बार गौ कर यानी काओ सैस लागू किया गया था। इसके तहत लोग सभी प्रकार के वाहनों की खरीद, बिजली, सीमेंट, शराब और बाकी मदों की खरीदारी पर अलग-अलग स्लैब के हिसाब से इसका भुगतान करते हैं। सरकार ने म्युनिसिपल कानून के तहत सभी नगर निगम को यह अधिकार िदए थे, उनकी हद में जिन वाहनों की बिक्री होती है उसके सेस को वह सीधे वसूल सकते हैं। इसका इस्तेमाल आवारा पशुओं को सड़क से हटाकर शेल्टर होम में भेजने के लिए किया जाना था। वर्ष में करीब इस पर एक करोड़ रुपए से अधिक का खर्च अब तक इसमें आ रहा है। जालंधर नगर निगम ने कारों ने तो इस टैक्स को अपने खाते में लेना शुरू कर दिया, लेकिन दो पहिया वाहनों का प्रस्ताव लंबित है। निगम के जानकार बताते हैं कि एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार किया गया था। इसके तहत हर वाहन विक्रेता को एक लॉगिन दे दिया गया है। जब कोई व्यक्ति कार की खरीदारी करता है तो उसकी आरसी अप्लाई करने के साथ ही 1000 रुपए काओ सेस जमा करवाता है। यह पैसा सीधे नगर निगम के बैंक अकाउंट में आ जाता है। पिछले एक साल के भीतर कारों की बिक्री से मिले 1 करोड़ 64 लाख के अलावा बिजली पर लगे काओ सैस की कमाई सहित 4 करोड़ 50 लाख रुपए की आमदनी हुई। इस पैसे से आवारा जानवरों को सड़कों से रेसक्यू करने और शाहकोट की गौशाला के संचालन के लिए दिया जाता है। नया प्रस्ताव नए मेयर और शाखा कमेटी की इच्छा पर निर्भर दोपहिया वाहनों पर काओ सेस वसूले जाने संबंधी प्रस्ताव लाने को लेकर सबसे पहले भूमिका नए मेयर की होगी। इस प्रस्ताव को तैयार करने को लेकर अगली जिम्मेदारी रोड सेफ्टी शाखा कमेटी निभाएगी। नगर निगम की सभी शाखा की अलग-अलग पार्षद कमेटी बनेगी। इस कमेटी का अलग से चेयरमैन होता है। इन सब पर निर्भर करेगा कि नया प्रस्ताव आता है या नहीं। इसके लिए निगम के नए हाउस को एक प्रस्ताव लाना होगा। इसके तहत स्थानीय निकाय विभाग के चंडीगढ़ कार्यालय को लिखित मसौदा भेजना होगा कि निगम की हद में जो दो पहिया वाहन बिक रहे हैं, उसकी टैक्स कलेक्शन सीधे निगम के खाते में डाली जाए। वर्तमान में निगम के पास एक वर्ष में करीब 4.50 करोड़ रुपए की कमाई इस टैक्स से होती है। गांव नुस्सी में भी हो चुका है ऐसा मामला हुस्न लाल, रणजीत सिंह बाहिया, रविंदर पाल, बलविंदर पाल, सुरिंदर कौर फौजी, परमिंदर कौर, बलबीर कौर ने कहा कि उनके गांव में जो कुछ हुआ। उससे पहले गांव नुस्सी में भी हो चुका है। गांव के सरपंच तीर्थ लाडी ने तब सारे मामले को हल करवाया और फूड सप्लाई विभाग के दफ्तर के सामने प्रदर्शन भी किया था। तब जाकर गांव के लोगों की पर्चियां काटी जाने लगी। अब लगता है। उन्हें भी ऐसा ही करना पड़ेगा। फूड सप्लाई विभाग के अफसर जल्द पर्चियां काटने का काम शुरू करवाएं।


