दौसा के विशिष्ट केंद्रीय कारागार श्यालावास में बुधवार को मानवाधिकार दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर बंदियों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बंदियों ने मानवाधिकारों पर भाषण दिए, सुंदर चित्रकारी की, कविता पाठ किया और प्रश्नोत्तरी में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मानवाधिकारों के सरल परिचय से हुई, जिसके बाद बंदियों ने समानता, सम्मान और सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। जेल अधीक्षक पारस जांगिड ने बताया कि जेल में मानवाधिकारों का सबसे बड़ा आधार मानवीय गरिमा है। उन्होंने कहा कि बंदियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, कानूनी सहायता, परिवार से मिलने का अधिकार और सुधार व पुनर्वास के अवसर प्रदान करना जेल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जांगिड ने यह भी बताया कि उनका प्रयास है कि प्रत्येक बंदी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सीखे। आरएसी के प्लाटून कमांडर मनेश कुमार ने कहा कि मानवाधिकार दिवस का उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच, समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना है, ताकि वे समाज में लौटकर एक बेहतर जीवन जी सकें। कार्यक्रम का समापन सभी बंदियों द्वारा सामूहिक रूप से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के उच्चारण के साथ हुआ, जिससे परिसर में शांति और सद्भाव का संदेश फैला। इस अवसर पर जेलर दिलावर खान, मुख्य प्रहरी राजेंद्र सिंह, रामजीवन कटानिया सहित जेल स्टाफ और बंदी उपस्थित रहे।


