150 से अधिक मामलों में वांछित 2 आरोपी गिरफ्तार:अमीर बनाने के नाम पर लोगों से करते थे ठगी, 5 राज्यों में फैला है इनका जाल

जोधपुर की मतोड़ा थाना पुलिस ने निवेश के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले दो शातिर आरोपियों को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ 23 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। मतोड़ा थाना अधिकारी अमानाराम ने टीम के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी ओमप्रकाश उर्फ ओपेन्द्र और सुभाषचंद, दोनों निवासी पनलावा, थाना बलारा, जिला सीकर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 7 फरवरी 2024 को मतोड़ा थाना क्षेत्र के निवासी अशोक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी मेगसिंह, सुभाष और रणवीर ने उसे नेक्सा एवरग्रीन कंपनी में निवेश करने का लालच दिया था। आरोपियों ने कहा था कि कंपनी धोलेरा (गुजरात) में एक बड़ा प्रोजेक्ट कर रही है, जिसमें निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलेगा। शिकायतकर्ता ने 23 लाख रुपए का निवेश किया, लेकिन बाद में न तो पैसे लौटाए गए और न ही कोई फायदा दिया गया। शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। 150 से ज्यादा केस, 80 बार गिरफ्तारी
जांच में सामने आया कि ओमप्रकाश और सुभाष शातिर ठग हैं, जो नेक्सा एवरग्रीन नामक कंपनी के जरिए प्रदेश सहित देशभर में लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं। राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में इनके खिलाफ करीब 150 मामले दर्ज हैं और अब तक करीब 80 मामलों में गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस दोनों आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ कर रही है। विश्वास की ठगी: ऐसे बनाते थे शिकार आरोपी पहले कंपनी में ऊंचा मुनाफा दिलाने का झांसा देते थे। भरोसा जीतने के बाद लोगों से मोटी रकम निवेश करवा लेते थे और फिर संपर्क तोड़कर फरार हो जाते थे। आरोपी कई शहरों में इस तरह की ठगी की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। निवेश में सावधानी बरतें
फलोदी पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया ने आमजन से निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कीम में जल्दी अमीर बनने के झांसे में न आएं। निवेश करने से पहले कंपनी की SEBI, RBI या IRDAI में पंजीकरण की जांच करें। अंजान व्यक्ति या ऐप के जरिए पैसे ट्रांसफर न करें। KYC, OTP या बैंक डिटेल कभी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध स्कीम, कॉल या मैसेज की सूचना तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112, साइबर हेल्पलाइन 1930, या www.cybercrime.gov.in पर दें।

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