ग्रामीण विकास के लिए पंचायतों को अधिकार देने की मांग:राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कहा- बदलाव न होने के कारण गांव उजड़ रहे

अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर संयुक्त अभिभावक संघ, युवा हल्ला बोल, भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी और ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राजस्थान के राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राज्य की ग्राम पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता, स्थायी आय स्रोत और JDA सहित सभी विकास प्राधिकरणों द्वारा अधिगृहीत भूमि का 50% विकसित हिस्सा पंचायतों को वापस देने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब, दलित और वंचित वर्ग आज भी आवास, मूलभूत सुविधाओं और आवश्यक दस्तावेजों के लिए संघर्ष कर रहा है। वित्तीय अधिकारों और संसाधनों की कमी के कारण ग्राम पंचायतें अपेक्षित विकास कार्य करने में सक्षम नहीं हैं। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा- 70 वर्षों बाद भी ग्राम पंचायतें स्थायी आय स्रोतों से वंचित हैं। यदि अधिगृहीत भूमि का 50% विकसित हिस्सा पंचायतों को दिया जाए, तो गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी। ग्रामीण शिक्षा में अपेक्षित बदलाव न होने के कारण गांव उजड़ रहे हैं और परंपराएं व संस्कार कमजोर हो रहे हैं। युवा हल्ला बोल की प्रदेश अध्यक्ष ईरा बॉस ने कहा- ग्राम स्तर पर वित्तीय स्वायत्तता ही वास्तविक लोकतंत्र की नींव है। जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर पंचायतों को अनिवार्य बजट मिलना चाहिए। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण पलायन रुकेगा। भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनीष कुमार नाडार ने कहा- मूल निवास, जाति व आय प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार ग्राम सरकार को दिया जाना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार कम होगा और नागरिकों की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे रोहिंग्या, बांग्लादेशी व पाकिस्तानी घुसपैठ जैसे मुद्दों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।” प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल की पहल से ग्रामीण स्वायत्तता को लेकर राज्य में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया जाएगा। आगे पढ़ें जयपुर की अन्य खबरें…

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