हर माह 250 से ज्यादा गंभीर मरीज सदर अस्पताल से रिम्स रेफर, चार साल में सुपर-स्पेशियलिटी बढ़ी, लेकिन वेंटिलेटर सपोर्ट न मिलने से रोज गंभीर मरीजों को करना पड़ रहा रेफर
सदर अस्पताल में पिछले चार सालों में इतनी सुविधाएं बढ़ी हैं, जितनी देश के किसी दूसरे जिला अस्पतालों में नहीं बढ़ी। यहां 10 से ज्यादा सुपर स्पेशियलिटी विभाग संचालित हो रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर स्थिति ऐसी भी है कि इतनी सुविधाओं के बावजूद रोजाना 8 से 10 गंभीर मरीज रिम्स रेफर किए जा रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है, पर सदर अस्पताल में वेंटिलेटर की संख्या के कारण रिम्स रेफर करना पड़ता है। पिछले एक माह में 250 से ज्यादा मरीज रिम्स रेफर किए जा चुके हैं। क्योंकि सदर अस्पताल में अलग क्रिटिकल केयर यूनिट होने के बाद भी 5 से 6 वेंटिलेटर मशीन ही कार्यरत हैं। ये मशीन भी ज्यादातर समय किसी मरीज को लगी रहती हैं। ऐसे में अन्य मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें रिम्स रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसा नहीं है कि सदर अस्पताल में एक्सपर्ट की कमी है या वेंटिलेटर मशीन की उपलब्धता नहीं है। 75 वेंटिलेटर सदर में हैं, जो पीएम केयर से उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन इनमें एक भी वेंटिलेटर काम का नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो ये सभी वेंटिलेटर खराब गुणवत्ता वाले हैं। ये सभी केवल ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिहाज से ठीक हैं। गंभीर मरीजों को नहीं लगा सकते। इन्वेसिव सपोर्ट की कमी अब भी सदर अस्पताल में सबसे बड़ी चुनौती:- कितने वेंटिलेटर की जरूरत… सदर में तत्काल 20-25 नए इन्वेसिव वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर स्टाफ होने चाहिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सदर अस्पताल में आनेवाले मरीजों की संख्या को देखते हुए गंभीर मरीजों के लिए कम से कम 20-25 इन्वेसिव वेंटिलेटर, प्रशिक्षित टेक्नीशियन और 24×7 क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग टीम होना जरूरी है। यदि ये उपलब्ध हो जाएं तो सदर रांची वास्तव में देश का सबसे मजबूत जिला अस्पताल बन सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि मशीनें हैं, पर उपयोग योग्य नहीं। यही कारण है कि सदर से गंभीर मरीजों को रिम्स रेफर करना हर दिन की विवशता बन गई है। सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं ताे बढ़ीं, पर लाइफ सपोर्ट सिस्टम में है बड़ा गैप
सदर अस्पताल में बीते वर्षों में न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, हेमेटोलॉजी, आंकोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, गैस्ट्रो से लेकर कई सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू हुई हैं। डॉक्टर शानदार हैं, सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन क्रिटिकल मरीजों का इलाज वेंटिलेटर पर ही निर्भर करता है। जब लाइफ सपोर्ट सिस्टम ही कमजोर हो, तो बाकी सुविधाएं अधूरी रह जाती हैं। यही वजह है कि हर महीने 250 से ज्यादा मरीज रेफर हो रहे हैं। गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
गंभीर मरीज चाहे वह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर दुर्घटना, सांस रुकने की हालत या पोस्ट-ऑपरेशन जटिलताओं में हों उन्हें सेकेंडों के भीतर वेंटिलेटर सपोर्ट चाहिए होता है। ऐसी मेडिकल इमरजेंसी में ‘मशीन खाली नहीं है’ कहना किसी की जिंदगी और मौत के बीच फर्क बन जाता है। सदर अस्पताल में यही सबसे बड़ी समस्या बन रही है। कई मरीज के परिजन बताते हैं कि मरीज को ले जाने के दौरान कई बार हालत बिगड़ जाती है। पीएम केयर से मिले वेंटिलेटर खराब नहीं, पर गंभीर मरीजों को नहीं लगा सकते
पीएम केयर से मिले वेंटिलेटर खराब नहीं हैं, लेकिन वेंटिलेटर का जो इस्तेमाल होना चाहिए, उसके लिए ठीक नहीं हैं। पेशेंट को वेंटिलेटर लगाते ही मशीन की सांस फूलने लगती है। यदि गंभीर मरीज के लिए इसे इस्तेमाल में लाया जाए तो मरीज की परेशानी कम होने की बजाय और बढ़ सकती है। – डॉ. प्रभात कुमार, सिविल सर्जन, रांची


