इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी का नाम बदलेगा:यूनिवर्सिटी, कॉलेज और डिपार्टमेंट को ही एलएलबी कार्यक्रमों के लिए मान्यता देने का प्रावधान

जल्दी ही एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा प्रस्ताव, नया नाम होगा-डिपार्टमेंट ऑफ लीगल स्टडी
रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) के मोरहाबादी कैंपस स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी का नाम बदलेगा। उच्च शिक्षा के मानकों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के दिशा-निर्देशों को देखते हुए इसका नाम बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ लीगल स्टडी करने की तैयारी है।
बीसीआई के मुताबिक सिर्फ यूनिवर्सिटी, कॉलेज और डिपार्टमेंट को ही एलएलबी कार्यक्रमों के लिए मान्यता दी जाती है। ऐसे में इंस्टीट्‌यूट शब्द भविष्य में मान्यता के लिए समस्या बन सकता है। इसी कारण यह फैसला लिया गया है। इस पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। नाम बदलने के लिए लॉ फैकल्टी के डीन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने आरयू प्रशासन को औपचारिक रूप से प्रस्ताव भेजा था। अब इस प्रस्ताव को जल्दी ही एकेडमिक काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा। काउंसिल की मंजूरी के बाद इसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेज दिया जाएगा, ताकि अगले शैक्षणिक सत्र में मान्यता को लेकर कोई बाधा न आए। इस इंस्टीट्यूट में पांच वर्षीय एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई होती है। इधर, डिपार्टमेंट में छात्रों के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को बेहतर बनाने की दिशा में भी यूनिवर्सिटी ने तेजी दिखाई है। बुधवार को अधिकारियों ने इंस्टीट्यूट का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान लाइब्रेरी को अपग्रेड करने, बेसिक सुविधाओं में विस्तार, क्लासरूम सेटअप और शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता को लेकर तत्काल सुधार को मंजूरी दी गई। मूट कोर्ट की स्थापना, ताकि वास्तविक न्यायिक माहौल मिले
इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी में मूट कोर्ट भी स्थापित किया जा रहा है, जो छात्रों को वास्तविक न्यायिक माहौल से रूबरू कराएगा। यहां छात्र कोर्ट जैसी परिस्थिति में वाद-विवाद, केस की तैयारी और प्रस्तुति का अभ्यास करेंगे। यूनिवर्सिटी का मानना है कि मूट कोर्ट की मौजूदगी न सिर्फ छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी, बल्कि लॉ फर्म, कोर्ट प्रैक्टिस और न्यायिक प्रतियोगिताओं के लिए उनके कौशल को भी तरासेगी। साथ ही, यह सुविधा बीसीआई से एफिलिएशन के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा करने में सहायक बनेगी। क्या है मूट कोर्ट… मूट कोर्ट एक नकली न्यायिक कार्यवाही है, जहां कानून के छात्र कानूनी मामलों पर वकील और जज की भूमिका निभाते हैं। वास्तविक अदालत की प्रक्रियाओं, कानूनी शोध और मौखिक बहस का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं, जिससे उन्हें मुकदमेबाजी की बारीकियों और वकालत की कला सीखने में मदद मिलती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। 91 लाख रुपए का चेक दिया, चार माह बाद लौट आया
आरयू में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अगस्त में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी और अन्य कोर्स के लिए 91 लाख रुपए का चेक जारी किया। पर विश्वविद्यालय अधिकारी का हस्ताक्षर न मिलने से भुगतान नहीं हो सका। चौंकाने वाली बात यह है कि 4 माह बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन और इंस्टीट्यूट बेखबर रहा कि आखिर वे पैसे कहां गए। 4 दिसंबर को चेक वापस लौटा तो पूरी स्थिति सामने आई। इस लापरवाही के कारण इंस्टीट्यूट को शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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