झारखंड कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बदलाव होगा। इलाज में आ रही परेशानी को दूर करने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। व्यवस्था में संशोधन का प्रस्ताव तैयार है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस पर मंजूरी दे दी है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। राज्य के 3 लाख से अधिक कर्मचारी, पेशनर और उनके परिजन इस दायरे में आएंगे। नई व्यवस्था में आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत चिह्नित अस्पताल के अलावा सभी प्रमुख अस्पतालों में इलाज हो सकेगा। जिस अस्पताल में सीजीएचएस रेट (केंद्र की स्वास्थ्य योजना के तहत विभिन्न मेडिकल सेवाओं के लिए तय की गई अधिकतम दरें) की व्यवस्था नहीं है, वहां भी इलाज हो सकेगा। कैशलेस इलाज के साथ जरूरत पड़ने पर 5 लाख रु. तक एडवांस भी मिल सकेगा। अभी सरकार का टाटा एआईजी बीमा कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट है। बीमा कंपनी ने ही अस्पतालों का पैनल तैयार किया था। पर अब राज्य सरकार अस्पतालों का पैनल बनाएगी। यह योजना मार्च 2025 में लागू की गई थी। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
इन अस्पतालों में भी हो सकेगा इलाज… सीएमसी वेल्लोर, एआईजी हैदराबाद, टाटा ग्रुप के सभी हॉस्पिटल, आईएलबीएस नई दिल्ली, राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, रोहिणी-नीतिबाग दिल्ली, नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज बेंगलुरु, अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई, मेदांता-द मेडिसिटी गुड़गांव, इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, वसंत कुंज दिल्ली, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली, शंकर नेत्रालय चेन्नई व कोलकाता, नारायण हेल्थ बेंगलुरु, बीएम बिड़ला हॉस्पिटल कोलकाता। सीमित पैकेज, अच्छे अस्पताल नहीं, इसलिए बदलाव
सरकार ने माना कि बीमा के तहत सीमित पैकेज मिल रहा। इसमें भी कम राशि तय की जा रही है। पैकेज के अनुसार सभी बीमारी का इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में नहीं हो रहा है। आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना व मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत सूचीबद्ध सभी अस्पतालों को सूचीबद्ध नहीं किया गया। कई कर्मियों की शिकायत के बाद यह फैसला लिया गया। आगे क्या… बीमा कंपनी भी बदलेगी
टाटा एआईजी से सरकार का करार फरवरी 2026 में खत्म हो रहा है। कैबिनेट से संशोधित योजना को मंजूरी मिलने के बाद नई बीमा कंपनी के चयन के लिए टेंडर निकलेगा। बीमा कंपनी का चयन न होने पर झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी टेंडर के माध्यम से थर्ड पार्टी एश्योरेंस (टीपीए) का चयन करेगी। इसके लिए आरोग्य सोसाइटी की क्षमता बढ़ाई जाएगी। सीजीएचएस दर से अधिक खर्च होने पर भुगतान आरोग्य सोसाइटी के रिवॉल्विंग फंड से किया जाएगा।
प्रतिपूर्ति की भी व्यवस्था होगी… सभी सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध चिकित्सा संस्थानों में सामान्य मामले में 5 लाख रुपए तक और गंभीर में 10 लाख रुपए तक के इलाज की प्रतिपूर्ति बीमा कंपनी करेगी।


