सदर अस्पताल के सेंटर में आयुष्मान कार्ड बनवाती महिला। ग्रीन कार्ड बनने से लोगों को मिली है राहत : डीएसओ डीएसओ गुलाम समदानी ने बताया कि ग्रीन कार्ड नहीं बनने से मरीजों को इलाज कराने में काफी परेशानी होती थी। हर दिन लोग कार्ड बनवाने के लिए कार्यालय पहंुचते थे, लेकिन अब पूर्व से पेडिंग सभी कार्डो को बनाया जा रहा है। जिसके बाद लोग तुरंत आयुष्मान कार्ड बनाकर अपना इलाज करवा रहे हैं। ग्रीन कार्ड के साथ आयुष्मान कार्ड बनने से लोगों को राहत मिली है। हर दिन कार्यालय से 300 के आस-पास ग्रीन कार्ड निर्गत किए जा रहे हैं, ताकि जरुरतमंद लोग तुरंत आयुष्मान कार्ड बनवा सके। भास्कर न्यूज|गिरिडीह जिले में बीते 21 नवंबर से ग्रीन कार्ड का बनना शुरू हो गया है, उसके बाद से आयुष्मान कार्ड बनाने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मंगलवार तक जिले भर में रहने वाले 5074 परिवारों का ग्रीन राशन कार्ड बन कर तैयार हो गया है। सिर्फ गिरिडीह सदर अस्प्ताल के आयुष्मान सेंटर से अब तक 2242 लोगों का आयुष्मान कार्ड भी बन चुका है। जबकि, जिले के ग्रामीण इलाकों के सीएससी सेंटरों से भी ग्रीन कार्ड बनाने वाले लोग अपना आयुष्मान कार्ड भी बनवा रहे हैं, ऐसे में अगर ग्रामीण इलाकों की संख्या इसमें जोड़े तो करीब तक 4000 लोगों ने अपना आयुष्मान कार्ड बनवा लिया है। तीन वर्षों के बाद बन रहे ग्रीन कार्ड के बाद ही संभव हो सका है। तीन वर्षों तक राज्य और केंद्र सरकार की ओर से राशन कार्ड बनाने काम पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ था। ऐसे मंे कार्ड के अभाव में कई परिवार सरकारी राशन के साथ अपनी इलाज को लेकर काफी परेशान थे। कई लोग आयुष्मान कार्ड बनाने को लेकर परेशान रहते थे, लेकिन राशन कार्ड में कहीं पर नाम नहीं होने या फिर राशन कार्ड नहीं होने से इस सुविधा से वंचित हो गए थे। लेकिन, अब पूर्व से आवेदित लोगों का ग्रीन राशन कार्ड बनने लगा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभुकों को 5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज की सुविधा िमलती है। योजना के अंतर्गत परिवार के सभी सदस्यों को गंभीर से गंभीर बीमारी का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल, किडनी, कैंसर, हड्डी, न्यूरो समेत 1,700 से अधिक बीमारियों का उपचार पंजीकृत सरकारी और निजी अस्पतालों में कराया जा सकता है। अस्पताल में भर्ती होने पर ऑपरेशन, दवाइयां, आईसीयू, जांच और रहने का पूरा खर्च योजना कवर करती है। देशभर में कहीं भी आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा उपलब्ध है, जिससे दूसरे राज्यों में रहने वाले मरीजों को भी लाभ मिल रहा है। खास बात यह है कि पहले से बीमार मरीज भी इस योजना में शामिल होते हैं। बिना किसी कागज़ी प्रक्रिया के केवल कार्ड या आधार नंबर दिखाकर तुरंत कैशलेस इलाज शुरू हो जाता है।


