शिवलिंग शिव का निराकार स्वरूप है, पार्थिव शिवलिंग की पूजा करना सर्वश्रेष्ठ

महादेव की पूजा में पार्थिव शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व है। शिवलिंग शिव शक्ति के मिलन का निराकार प्रतीक है और उसकी पूजा से धन ऐश्वर्य आरोग्य और संतान सुख मिलता है अकाल मृत्यु टलती है, सभी संसारिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूर्ण होती है। इस ब्रह्मांड का प्रतीक भी कहा गया है। विशेष रूप से कलयुग में पार्थिव शिवलिंग की पूजा को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। शिव महापुराण के अनुसार शिवलिंग शिव का निराकार स्वरूप है, जिसे ब्रह्मा और विष्णु के बीच हुए विवाद के बाद भगवान शिव ने प्रकट किया था। इसका नित्य अभिषेक करने से अष्ट सिद्धियां प्राप्त होती हैं और दुखों का नाश होता है। वैदिक मंत्रों के साथ शिवलिंग की पूजा करना सबसे लाभकारी है। स्त्री-पुरुष सभी को शिवलिंग पूजन का अधिकार है। भगवान शिव ने स्वयं को अग्नि स्तंभ शिवलिंग के रूप में प्रकट किया, जिससे शिवलिंग की उत्पत्ति हुई और इसकी पूजा की परंपरा शुरू हुई। रामचरितमानस के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी लंका विजय से पहले कई पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। महाशिवपुराण का पाठ श्रवण करना अत्यंत पुण्यदायी है और इसे करने के विशेष विधि-विधान है। सबसे पहले विघ्नहर्ता गणपति गणेश की पूजा करें और उसके बाद भगवान शिव माता पार्वती और शिव महापुराण ग्रंथ की पूजा करें। शिव महापुराण ग्रंथ को हमेशा सफेद कपड़े में लपेटकर स्वच्छ स्थान पर रखें, कभी खुला ना छोड़े। ये बातें द्वारकाधीशधाम में बुधवार को आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा यज्ञ में कथावाचक प्रिया प्रियतम दास महाराज ने कही। कथा शुरू होने से पहले व्यास पीठ पर विराजमान होकर उन्होंने विधि-विधान के साथ शिव महापुराण की पूजा-अर्चना की और माल्यार्पण किया। ब्राह्मणों के लिए सुंदर उपदेश दिए गए और भोलेनाथ के भजनों पर भक्त भाव-विभोर हो गए। आरती के साथ दूसरे दिन की कथा का समापन हुआ और भक्तों के बीच प्रसाद बांटा गया। शिव महापुराण की पूजा हुई, भगवान भोलेनाथ के भजनों पर भक्त हुए भाव-विभोर चित्रकूटधाम से आए कथावाचक आचार्य प्रिया प्रियतम दास

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *