हाईकोर्ट के दो जजों की अलग-अलग राय:दो नक्सलियों की मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड पर हाईकोर्ट का अहम फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने हत्याकांड में दोषी करार दो माओवादियों सुखलाल उर्फ प्रवीर मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला की फांसी की सजा को कम करते हुए आजीवन कारावास में बदल दिया है। अदालत ने कहा कि अपराध भले ही अत्यंत गंभीर है, लेकिन चूंकि खंडपीठ के दो जजों ने सजा पर अलग-अलग निर्णय दिया था, इसलिए फांसी की सजा को बरकरार रखना संभव नहीं है। कोर्ट ने माना कि पुलिसकर्मियों के बयान दोनों को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं, पर कानूनी प्रक्रिया में मतभेद फांसी घटाने का पर्याप्त आधार है। 2013 में घात लगाकर किया गया था हमला
तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार वर्ष 2013 में दुमका के काठीकुंड में एक चुनावी बैठक में शामिल होने गए थे। लौटते समय माओवादियों ने उनकी टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस भीषण हमले में एसपी समेत छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। घटना के बाद दुमका की निचली अदालत ने दोनों माओवादियों को फांसी की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती: सजा के खिलाफ दोनों दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं। सुनवाई के दौरान खंडपीठ में मतभेद सामने आया। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था, जबकि जस्टिस संजय प्रसाद ने निचली अदालत के फैसले को सही माना। मामला मतभेद के बाद जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को भेजा गया। वहां फांसी को उम्रकैद में बदल दिया गया।

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