राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर और उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रतापगढ़ ने दो प्रमुख गतिविधियां आयोजित कीं। इनमें विद्यालयों की बाल वाहनियों का औचक निरीक्षण और मानवाधिकार दिवस पर जिला कारागृह में विधिक जागरूकता शिविर शामिल थे। जीरो माइल चौराहा और मंदसौर नाका क्षेत्र में बाल वाहनियों का निरीक्षण सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश केदारनाथ ने किया। इस दौरान उनके साथ जिला परिवहन अधिकारी और यातायात पुलिस भी मौजूद थी। निरीक्षण में पाया गया कि कुछ निजी स्कूल संचालक और वाहन चालक सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे थे। वाहनों का पूर्णतः पीले रंग में पेंट न होना, ‘On School Duty’ का स्पष्ट उल्लेख न होना, सुरक्षित लॉकिंग प्रणाली का अभाव, वैध फायर एक्सटिंग्विशर की कमी, इमरजेंसी एग्जिट की अनुपलब्धता, तथा चालक-सहायक के वैध लाइसेंस और निर्धारित क्षमता का पालन न होना जैसी कमियां सामने आईं। इन कमियों के लिए चालान बनाए गए और संबंधितों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। इसी क्रम में, मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जिला कारागृह में एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण केदारनाथ, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास मारग और अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट वर्षा सिंह ने बंदियों को भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों और मूल कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने समानता, स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता, शोषण से मुक्ति, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकारों तथा न्यायिक संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। इसके साथ ही, संविधान में जोड़े गए मूल कर्तव्यों-संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान, एकता-अखंडता की रक्षा, समरसता को बढ़ावा देने तथा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा-पर भी बंदियों को जागरूक किया गया। इन दोनों पहलों का मुख्य उद्देश्य जन सुरक्षा सुनिश्चित करना, संवैधानिक जागरूकता बढ़ाना और नागरिक अधिकारों को मजबूत बनाना रहा।


