एनजीटी की भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्र पीठ में मंगलवार को चंदनपुरा क्षेत्र में प्रस्तावित विकास योजनाओं को लेकर सुनवाई हुई। इसमें याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट को चुनौती दी, जिसमें चंदनपुरा क्षेत्र में ‘विकास’ को हरी झंडी दी गई थी। रिपोर्ट में इस क्षेत्र की जैविक संवेदनशीलता और वन्यजीव सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए विकास कार्यों की सिफारिश की गई है, जिसे पर्यावरण प्रेमियों ने गलत ठहराया है। याचिकाकर्ता रशीद नूर खान और अन्य पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया कि समिति ने चंदनपुरा क्षेत्र के पर्यावरणीय महत्व और यहां बाघों की आवाजाही को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि यह क्षेत्र जैविक रूप से संवेदनशील है और यहां हो रहे निर्माण कार्यों से बाघ गलियारा और प्रजनन स्थल को गंभीर नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे पर एनजीटी में हुई सुनवाई के दौरान एडवोकेट यशदीप सिंह ठाकुर ने निवेदन किया कि पर्यावरण समूह और याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर इस रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराएंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या राज्य सरकार इस रिपोर्ट पर पुनर्विचार करेगी, या फिर विकास कार्यों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। समिति ने एनजीटी को चंदनपुरा क्षेत्र के विकास के लिए एक समग्र योजना तैयार करने की सलाह दी थी, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह सिफारिश अपर्याप्त है। उनका कहना है कि जैविक सुरक्षा और वन्यजीवों के अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


