एमएसएमई विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया में बदलाव के चलते छोटे उद्यमियों को काम मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले मध्य प्रदेश में हर विभाग के टेंडर लघु उद्योग निगम के माध्यम से एकीकृत (सेंट्रलाइज्ड) रूप से जारी होते थे। इससे अलग-अलग विभागों में जाने की जरूरत नहीं होती थी। नई प्रणाली में हर विभाग अपने स्तर पर निविदाएं (टेंडर) जारी कर रहा है। कुछ विभाग सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) के जरिए टेंडरिंग कर रहे हैं। गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गौर ने बताया कि एकीकृत प्रणाली में उद्यमियों को एक ही जगह से पता चल जाता था कि किस विभाग में किस तरह की डिमांड है। नई व्यवस्था में विभाग अलग-अलग टेंडर जारी कर रहे हैं, इससे उद्यमियों को पता ही नहीं चल पाता कि कहां टेंडर डालना है। जेम पोर्टल की मानक नीति में कई शर्तें हैं, जिनसे छोटे उद्यमियों को समस्याएं हो रही हैं। गौर ने बताया कि उद्योग संघ ने मंत्री से पुरानी प्रणाली बहाल करने का अनुरोध किया था, लेकिन मंत्री का कहना है कि हर विभाग स्वतंत्र है कि वह अपनी आवश्यकता अनुसार टेंडर जारी करे।


