नरसिंहपुर जिले में एक पालतू कुत्ते को करंट लगाकर मार डालने का मामला सामने आया है। कुत्ते को पालने वाले परिवार के सदस्य रोते हुए गोदी में कुत्ते का शव लेकर थाने पहुंचे। उन्होंने आरोपी पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने जांच के बाद FIR का आश्वासन दिया है। घटना तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र के भामा गांव की है। कुत्ते को पालने वाले परिवार की महिला पूमा देवी ने कहा कि हम लोग सुबह ही थाने आ गए थे। दो घंटे से थाने में बैठे हैं। पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही है। गांव के ही कन्हैया केवट ने आपसी विवाद के चलते हमारे कुत्ते को करंट लगाकर मार डाला। मैंने बच्चों की तरह पाला था मदनलाल केवट ने बताया कि कुत्ते की आंखें भी नहीं खुली थी तब से ये हमारे पास था। इसे बच्चों की तरह पालकर बड़ा किया। आज सुबह कुत्ता घर के बाहर गया था। काफी देर लौटकर नहीं आया तो मैं उसे तलाश करने गया। कन्हैया केवट ने मेरे सामने ही कुत्ते को करंट लगाकर मार डाला और नाले में फेंक आया । मैंने ये बात अपने गांव के लोगों को बताई तो सबने थाने जाने कहा। इसलिए यहां आया हूं।
कन्हैया केवट पहले भी कई बार मेरे कुत्ते पर हमला कर चुका था लेकिन गांव का मामला था हमने कुछ नहीं कहा। लेकिन, उसने आज मेरे बच्चे जैसे कुत्ते की जान ले ली। पुलिस ने दर्ज की शिकायत, पीएम के लिए भेजा शव तेंदूखेड़ा पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर ली है। पुलिस ने कुत्ते के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है। हो सकती है 3 साल की जेल
कुत्ते के काटने और पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों सजा के प्रावधान हैं। महिलाओं से अधिक पुरुषों को काटते हैं कुत्ते जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में छपे एक अध्ययन के मुताबिक महिलाओं की तुलना में 81 प्रतिशत अधिक पुरुषों को कुत्ते काटते हैं। शोध में बताया गया है कि कुत्ते का काटना व्यक्ति की उम्र, जेंडर और उसके व्यवहार पर निर्भर करता है। कुत्ते को देखकर घबराने से उसके काटने का रिस्क बढ़ जाता है। जबकि इसी तरह के एक अध्ययन में बताया गया है कि बिल्ली पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक काटते हैं। रेबीज से पीड़ित व्यक्ति को पानी से लगता है डर रेबीज का वायरस ब्रेन पर सीधे अटैक करता है। इसलिए गुस्से में बड़बड़ाना, घबराहट, बेचैनी, कंफ्यूजन जैसे लक्षण दिखते हैं। कभी-कभी शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। इसके अंतिम फेज में पीड़ित को हाइड्रोफोबिया हो सकता है। हाइड्रोफोबिया में व्यक्ति को पानी से डर लगता है। पानी पीने से ही नहीं, पानी को देखते ही डर लगने लगता है। कई बार पीड़ित को लाइट से भी डर लगता है। व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।


