भीलवाड़ा में अनोखी बारात सात नावों से निकली, तालाब में सजी 7 नावों से 5 किलोमीटर का सफर तय हुआ ओर बाराती सजी धजी नावों में डीजे बजाते हुए नाचते गाते पहुंचे। गांव की यह शादी क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी। सात नावों पर निकली यादगार बारात गंगापुर उपखंड क्षेत्र के लाखोला गांव में इस बार एक ऐसी अनोखी और यादगार बारात निकली, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आज के दौर में जहां बैंड–बाजे, DJ और भव्य कार–काफिलों वाली बारातें आम होती जा रही हैं, वहीं लाखोला गांव में बारात को तालाब के अंदर नावों से ले जाने का निर्णय लिया। नावों से तय हुआ 5 किमी का सफर ये अनोखी नाव-बारात पूरा 5 किलोमीटर का सफर तय करते हुए लाखोला से बगैरा गांव स्थित रमेश जाट के घर पहुंची। गांववालों के मुताबिक,क्षेत्र में इससे पहले हेलीकॉप्टर से बारात जाती हुई देख तालाब के रास्ते नावों में गई बारात पहली बार देखने को मिली। बारात मांगीलाल जाट के पुत्र की थी, जिसमें कुल 7 सजाई गई नावें शामिल थीं।हर नाव को फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी लाइटिंग, बलून और पारंपरिक साज-सज्जा से खूबसूरती से सजाया गया था। दूल्हे की नाव सबसे आगे नावों के इस काफिले में दूल्हे की नाव सबसे आगे रखी गई,इसके पीछे बाराती अपनी-अपनी नावों में गीत–संगीत और उत्साह के साथ तालाब के बीच से आगे बढ़ते गए। 5 किलोमीटर लंबा यह सफर तालाब में लहरों के साथ दोस्ती करते हुए बेहद मनोरम और रोमांचक नजर आ रहा था। परिवार के लोगों ने बताया की गांव में पहले हेलीकॉप्टर से बारात जाने की चर्चा ने उन्हें प्रेरित किया कि इस बार कुछ ऐसा किया जाए जो बिल्कुल नया, अनोखा और यादगार हो ऐसा जो परंपरा की खुशबू के साथ गांव का गौरव भी बढ़ाए।इसी सोच से नाव-बारात का विचार आया जिसे परिवार ने दिया स्वीकार किया। बारात के किनारे पहुंचने पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए जैसे ही बारात की नावें तालाब में उतरीं, सैकड़ों ग्रामीण किनारे पर एकत्रित हो गए। महिलाएं मंगल गीत गाती रहीं, बच्चे उत्साह से तालियां बजाते रहे और बुजुर्ग इस अनोखे आयोजन की सराहना करते नहीं थके।पूरे रास्ते लोग मोबाइल कैमरों में इस दृश्य को कैद करते रहे।लाखोला गांव से बगैरा तक नावों में 5 किलोमीटर का यह सफर चर्चा का विषय बना।गांववालों ने कहा समय बदल सकता है, साधन बदल सकते हैंपर परंपरा और नवाचार मिल जाएं तो इतिहास बन जाता है।


