घर में घुसकर बेटी के सामने मां की हत्या:मेरठ में 2 नकाबपोश बाइक से आए; गोली मारी फिर चाकू से किए ताबड़तोड़ वार​​​​​​​

मेरठ में बुधवार को बेटी के सामने उसकी मां की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो आरोपी नकाब बांधकर बाइक से आए। अंदर घुसे और दूसरी मंजिल पर पहुंचे। उन्होंने महिला के माथे पर गोली मारी, फिर चाकू से गोद डाला। मृतका प्रधान भी रह चुकी थी। महिला की बेटी और नातियां बचने के लिए बाहर भागीं। चीखने की आवाज सुनकर पड़ोसी भी आ गए और महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस आरोपी की तलाश के लिए आसपास के CCTV खंगाल रही है। मामला कंकड़खेड़ा के रोहटा स्थित नारायण गार्डन का है। पहले 4 तस्वीरें… डेढ़ करोड़ का विवाद चल रहा था
जानी थाना क्षेत्र के गांव भोला में सोहनवीरी पत्नी यशपाल रहती थी। वह पूर्व प्रधान थी। 3 दिन पहले वह अपनी बेटी निशा के घर नारायण गार्डन में रहने के लिए आई थीं। सोहनवीरी के एक बेटा निशांत भी था, जिसकी 3 साल पहले मौत हो चुकी है। करीब 4 साल पहले बेटे निशांत ने ऋषिकेश से डेढ़ करोड़ रुपए का स्क्रैप खरीदा था। इस स्क्रैप को लेकर तभी से उसका उत्तराखंड के कुछ लोगों से विवाद चलने लगा था। दरअसल, निशांत ने पैसा पूरा दे दिया था, लेकिन उसे माल नहीं दिया गया था। बेटी निशा ने बताया- मेरे सामने मां को गोली मार दी गई। इसके बाद चाकू से गोद दिया। मेरे भाई का उत्तराखंड के रहने वाले सौदान, आदर्श गुप्ता और जितेंद्र गुप्ता का डेढ़ करोड़ का विवाद चल रहा था। भाई की मौत के बाद मां रुपए वापस लेने के लिए कोर्ट में केस लड़ रही थी। इस वजह से उन लोगों ने मेरी मां को मार डाला। …………………… ये खबर भी पढ़ें- अयोध्या में हार का बदला मिल्कीपुर जीतकर लेगी भाजपा, अखिलेश के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, नतीजों का पूरे देश में जाएगा मैसेज रामनगरी अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। पांच फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी को रिजल्ट आएगा। राजनीतिक दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ मिल्कीपुर के उपचुनाव पर भी रहेगी। इस सीट पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला होगा। दोनों ही दलों की साख इस सीट पर दांव पर रहेगी। दोनों ही दलों के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक पर पकड़ की परीक्षा होगी। भाजपा लोकसभा चुनाव में अयोध्या में हार का बदला लेना चाहती है। वहीं, अखिलेश के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है। पढ़ें पूरी खबर

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