पुत्रदा एकादशी का व्रत कल, शुभ योग और कृतिका नक्षत्र का बन रहा संयोग

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन दान को विशेष फलदायी माना गया है। दान को आध्यात्मिक उन्नति का साधन कहा गया है। भागवत पुराण में कहा गया है कि किसी भी शुभ दिन पर दान करने से व्यक्ति को अनंत पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन ब्राह्मणों तथा दीन-हीन, असहाय, जरूरतमंदों को दान देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से अन्न, वस्त्र और धन का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। दान करते समय भाव का शुद्ध होना सबसे जरूरी है। सभी एकादशी व्रत भगवान नारायण को समर्पित हैं साल के 24 एकादशी व्रत को पवित्र और शुभ माना गया है। जिसमें दो व्रत पुत्रदा एकादशी का होता है। एक पौष माह का और दूसरा श्रावण माह में, सभी एकादशी भगवान नारायण को समर्पित है। इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत को वैसे दंपती को करना चाहिए, जिन्हें संतान सुख की कामना हो। इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होती है। रांची | शुभ योग और कृतिका नक्षत्र के शुभ संयोग में पौष माह की शुक्ल पक्ष एकादशी 10 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिष शालिनी वैद्य ने बताया कि इस एकादशी व्रत को संतान प्राप्ति और संतान के कल्याण के लिए शुभ माना गया है। इसका व्रत आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। पौष पुत्रदा एकादशी तिथि आरंभ 9 जनवरी को दिन के 11.30 बजे होगी और अगले दिन 10 जनवरी को सुबह 9.22 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि होने के कारण एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। 11 जनवरी को एकादशी व्रत का पारण सुबह 7.26 बजे होगा। आचार्य पंडित प्रणव मिश्रा ने कहा कि इस दिन लड्डू गोपाल जी को पंचामृत से स्नान कराने से संतान के जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर होती हैं। इस दिन माता तुलसी को घी का दीपक दिखाएं। पौष माह की पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के बाद उन्हें भोग लगाएं। साथ ही तुलसी दल भी रखें। जिस किसी के संतान की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या बच्चा लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहा है, तो इस दिन भगवान विष्णु को अनाज चढ़ाकर इसे गरीबों में बांट देना चाहिए। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को अपने मन, वचन और कर्म को शुद्ध रखना चाहिए। माता तुलसी को घी का दीपक दिखाएं

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