सरकारी-स्कूल में धूमधाम से होगी सफाईकर्मी की बेटियों की शादी:10 साल पहले हुई पिता की मौत; प्रिंसिपल समेत 3 गांवों के ग्रामीण बोले- अब वो हमारा परिवार

डीडवाना-कुचामन जिले के सरकारी स्कूल में सफाई का काम करने वाले बंशी वाल्मीकि की 10 साल पहले मौत हो गई। घर की जिम्मेदारी 2 बेटियों पर आ गई। दोनों ने पिता की जगह स्कूल में सफाई करना शुरू कर दिया। अब दोनों बहने बड़ी हो चुकी है। ऐसे में स्कूल स्टाफ ने उन्हें अपना परिवार मानते हुए दोनों बहनों की शादी धूमधाम से करने का फैसला किया है। मामला डीडवाना के गांव ललासरी के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल का है, जहां स्कूल परिसर में दोनों लड़कियों की शादी के लिए विशेष परमिशन ली गई है। साथ ही स्कूल की बिल्डिंग को भव्य तरीके से सजाया गया है। स्कूल प्रिंसिपल हरवीर सिंह जाखड़ ने दोनों बहनों की शादी में सहयोग के लिए स्टाफ से चर्चा की। आर्थिक सहायता के लिए 2 भामाशाहों से भी बात की। देखते ही देखते ललासरी गांव के साथ- साथ ललासरी पंचायत के गांव लुनोदा और नेतडों की ढाणी समेत 3 गांवों के ग्रामीणों ने शादी में सहयोगी बनने की इच्छा जताई। ग्रामीणों ने कहा- दोनों बेटियां सिर्फ स्कूल की नहीं, अब तीनों गांव की बेटियां है। ऐसे में उनकी शादी में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आने देंगे। स्कूल परिसर में पूरी होंगी सभी रस्में
पूजा और उसकी छोटी बहन सुनीता की शादी से जुड़ी सभी रस्में स्कूल परिसर में ही पूरी होंगी। शादी में गांव का सर्व समाज एक ही जाजम पर बैठने को तैयार है। 10 दिनों से दोनों बेटियों की शादी की सभी रस्में स्कूल परिसर में पूरी की जा रही है। हल्दी, मेहंदी और पीले चावल से लेकर महिला संगीत का आयोजन भी स्कूल परिसर में ही किया गया है। महिला कार्यक्रम में स्कूल की टीचर्स ने पेरेंट्स की भूमिका अदा की है। बेटियों की शादी के आमंत्रण गांव की तरफ से छपवाए गए। आमंत्रण लिखने से लेकर मेहमानों को बुलाने के लिए वितरण तक का काम स्कूल स्टाफ ने ही किया। शाम को होगी शादी
आज (13 दिसंबर) को दोनों बेटियां विवाह बंधन में बंधेगी। एक तरफ स्कूल को सजाया गया है, वहीं दूसरी तरफ मेहमानों का स्वागत पारम्परिक राजस्थानी तरीके से किया जा रहा है। मेहमान का स्कूल की छात्राएं राजस्थानी पहनावे में तिलक लगाकर स्वागत कर रही हैं। स्कूल स्टाफ और ग्रामीण मोतियों की माला गले में डाल कर आवभगत कर रहे हैं। मेहमानों के खाने के लिए एक ही जगह व्यवस्था की गई है। सभी भेदभाव भुलाकर सब एक ही जाजम पर खाना खा रहे हैं और सामाजिक समरसता का एक अनूठा मैसेज दे रहे हैं। दोनों बहनें बोलीं- हमारे लिए पूरा गांव एक हुआ, यहीं हमारी खुशी
पूजा की शादी मकराना के नजदीक मनाना गांव निवासी महेंद्र के साथ हो रही है। जबकि सुनीता की शादी डीडवाना के ही कीचक गांव निवासी नरसी के साथ हो रही है। दुल्हन बन रही पूजा का कहना है- आज हमारी वजह से पूरा गांव एक है, इस बात की खुशी है। दोनों बहनों को पिता की कमी उनकी आंखों में देखी जा सकती है, लेकिन उन्हें खुशी भी है कि आज पूरा गांव उनके लिए परिवार बनकर खड़ा है। ग्रामीणों का कहना है- स्कूल के प्रिंसिपल की इस पहल ने पूरे गांव को एक कर दिया है। हर गांववासी अपनी तरफ से बेटियों के लिए सहयोग कर रहा है। यह गांव के लिए गौरव की बात है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल एक शुरुआत है बदलाव की, जिसके हम साक्षी बन रहे हैं।

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