टीकमगढ़ शहर के तालदरवाजा मोहल्ला स्थित प्रसन्न राघव मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार शाम कथावाचक आचार्य मुकुटधर पाण्डेय ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वर्णन किया। इस अवसर पर उन्होंने धर्म की स्थापना और ईश्वर के हर युग में अवतरण के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान आचार्य पाण्डेय ने प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार, नरसिंह अवतार और समुद्र मंथन की कथाएं भी सुनाईं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर श्रोता भाव-विभोर हो उठे। जन्मोत्सव के दौरान ‘अवतार भयो आली कन्हैया को’, ‘बृज में हो रही जय जयकार’ जैसे भजनों पर श्रोता झूम उठे और जमकर नृत्य किया। व्यास गद्दी से आचार्य मुकुटधर ने श्रोताओं पर मिश्री, लड्डू और मिठाइयां लुटाईं। बच्चों ने मटकी फोड़कर उत्सव का आनंद लिया। आचार्य मुकुटधर पाण्डेय ने श्रीकृष्ण जन्म के महत्व को बताते हुए कहा कि यह अधर्म पर धर्म की विजय, बुराई के नाश और ईश्वर के अवतरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कथा सिखाती है कि आनंद (कृष्ण) हमेशा अहंकार (कंस) और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करता है। यह नैतिकता, प्रेम, निस्वार्थता और जीवन में हर परिस्थिति में शांत रहकर आनंदित रहने का संदेश देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईश्वर हर युग में धर्म की स्थापना के लिए आते हैं। कथा में संगीत पर जयनारायण पाण्डेय, सत्यम श्रीवास्तव और कुंजेलाल ने संगत दी। आयोजक राज्जू महाराज ने बताया कि कथा का विश्राम 14 दिसंबर को रुक्मणी विवाह और 15 दिसंबर को सुदामा चरित्र व बृज की फूल होली के साथ होगा।


