ब्यावर के बदनौर में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के भाई पर हुए हमले के मामले में अदालती लड़ाई ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने ब्यावर सेशन कोर्ट के उस चर्चित आदेश पर सख्त रुख अपनाया है, जिसमें सेशन जज ने स्थानीय पुलिस व्यवस्था को ‘जंगल राज’ करार देते हुए सीबीआई जांच के आदेश दे दिए थे। जस्टिस सुदेश बंसल की कोर्ट ने न केवल इस मामले में 4 आरोपियों को जमानत दे दी, बल्कि सेशन जज द्वारा दिए गए प्रशासनिक निर्देशों को ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर’ बताते हुए पूरे मामले की रिपोर्ट हाईकोर्ट के ‘एक्टिंग चीफ जस्टिस’ को भेजने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट का फैसला: “जमानत की सुनवाई में ऐसे आदेश अनुचित” जस्टिस सुदेश बंसल ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी जितेंद्रसिंह, भारतसिंह, मनोज और ओमप्रकाश की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेशन जज (ब्यावर) द्वारा 25 नवंबर को दिए गए निर्देश- जैसे अवैध खनन रोकना और सीबीआई जांच, जमानत याचिका तय करते समय जज के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सेशन कोर्ट के उन निर्देशों में कोई दखल नहीं दे रहा, लेकिन प्रभावित पक्ष (आरोपी या सरकार) कानून के अनुसार उनके खिलाफ अपील कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जस्टिस बंसल ने रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को निर्देश दिया कि सेशन जज, ब्यावर के 25 नवंबर के आदेश की कॉपी ‘माननीय एक्टिंग चीफ जस्टिस’ के अवलोकन के लिए रखी जाए। सेशन कोर्ट ने क्यों कहा था ‘जंगल राज’? कहानी का दूसरा पहलू ब्यावर सेशन कोर्ट का वह 13 पन्नों का आदेश है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया था। 25 नवंबर को जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता ने आरोपियों की जमानत खारिज करते हुए पुलिस और खनन माफिया के गठजोड़ पर तल्ख टिप्पणी की थी। सेशन जज ने लिखा था, “हमलावरों को पुलिस और खान विभाग से सांठ-गांठ तथा ऊंची राजनीतिक पहुंच का लाभ मिल रहा है। यह बदनौर थाना क्षेत्र में कानून के राज की बजाय ‘पुलिस राज’ एवं ‘जंगल राज’ की स्थिति को दर्शाता है”। मजिस्ट्रेट का घर भी सुरक्षित नहीं सेशन कोर्ट की नाराजगी की मुख्य वजह यह थी कि जिस घर में 50-60 लोगों की भीड़ ने हमला किया, वह एक न्यायिक अधिकारी (मजिस्ट्रेट) का निवास है। पीड़ित सुनील कुमार, जो एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं, एक मजिस्ट्रेट के भाई हैं। सेशन कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “जब असामाजिक तत्व एक न्यायिक अधिकारी के घर में दिन-दहाड़े घुसकर जानलेवा हमला कर सकते हैं, तो आम नागरिक की क्या दुर्गति होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है”। सेशन कोर्ट ने दिए थे ये 3 बड़े ‘अल्टिमेटम’ सेशन जज ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए तीन सख्त निर्देश दिए थे, जिन पर अब हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं: हाईकोर्ट में जमानत का आधार हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट की भावनाओं के विपरीत, तथ्यों और साक्ष्यों पर ध्यान दिया। जस्टिस सुदेश बंसल ने जमानत देते हुए निम्नलिखित कारण गिनाए:


