पेयजल की शहर में कोई कमी नहीं है, लेकिन जिम्मेदारों की समस्या यह है कि वे न तो बारिश के पानी को सहेज पा रहे हैं और न ही उसे ठीक ढंग से बांट पा रहे हैं। इसलिए सर्दियों के मौसम में ही गर्मियों में पानी की सप्लाई कैसे होगी? इसकी चिंता शुरू हो गई है। जल संसाधन विभाग ने तो एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई के लिए पत्राचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप के चलते फिलहाल उनकी मांग नहीं मानी गई है। खास बात यह है कि शहर के लोगों को उनकी जरूरत से कई गुना ज्यादा पानी रोजाना सप्लाई किया जा रहा है, इसके बाद भी कई इलाकों में पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। शहर में कुल संपत्तियां 3.50 लाख हैं। इनमें से 60 हजार संपत्ति स्वामियों ने खुद ही बोरिंग करा रखी हैं। जानकारों के अनुसार प्रत्येक बोरिंग से रोजाना लगभग 2000 लीटर पानी निकाला जाता है। कारण: 1. वितरण में गड़बड़ी, 2. नए बांध नहीं बनाए, 3. एक सदी पुराने तिघरा पर ही निर्भर पेयजल… जरूरत 22.5 करोड़ लीटर की, सप्लाई रोज 42 करोड़ लीटर शहर के 15 लाख लोगों को राष्ट्रीय मानक 150 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से रोजाना करीब 22.5 करोड़ ली. पानी की जरूरत है। जबकि शहर में रोज 42 करोड़ ली. से ज्यादा पानी सप्लाई किया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब शहर के विस्तार वाले कई क्षेत्रों पानी सप्लाई की लाइनें ही नहीं बिछी हैं। वहीं टेल एंड के क्षेत्रों में जरूरत से कम पानी लोगों को मिल पा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट – एपीएस भदौरिया, पूर्व उपायुक्त नगर निगम वाटर ऑडिट और लीकेज रोकना जरूरी
शहर में पानी की कमी नहीं है, वितरण व्यवस्था की स्थिति गंभीर है। सबसे पहले तो पुरानी व्यवस्था को बहाल करना होगा। इसमें सब इंजीनियरों को सुबह सप्लाई के समय क्षेत्र में घूमना पड़ेगा, ताकि समस्याओं का समाधान तत्काल कराया जा सके। पेयजल सप्लाई लाइनों पर एडीबी प्रोजेक्ट के दौरान बल्क मीटर लगाए गए थे। ये व्यवस्था दोबारा से करना होगी, ताकि हमें पता चल सके कि किस क्षेत्र में कितना पानी जा रहा है। रोजाना लाइनें फूट रही हैं। 15-20 दिन में ठीक हो पाती हैं। ऐसे कई लीकेज हैं, जिन पर नियंत्रण जरूरी है। 25 से 30 प्रतिशत पानी लॉस होता है… जल संसाधन विभाग द्वारा जितना पानी देने का क्लेम किया जाता है, उतना पानी रोजाना प्लांट पर आता नहीं। कुछ बल्क सप्लाई वाले क्षेत्रों में पानी जाता है। प्लांट और सप्लाई के दौरान 25 से 30 प्रतिशत पानी लॉस होता है। हम सुधार कर रहे हैं ताकि पानी के लॉस को रोका जा सके। -संजीव गुप्ता, कार्यपालन यंत्री, नगर निगम


