मप्र का केंद्र को प्रस्ताव- ऊपर खेती, नीचे नहर:केन-बेतवा लिंक की नहर टनल जैसी होगी, लंबाई 69 किमी घटेगी

देश की पहली नदी जोड़ परियोजना केन-बेतवा लिंक में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण में आ रही परेशानियों को देखते हुए प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि नहर को ओपन कैनाल के बजाय जमीन के भीतर टनल या पाइप कंड्यूइट में बनाया जाए। इससे नहर की लंबाई 218 किमी से घटकर 149 किमी रह जाएगी। भूमि अधिग्रहण भी 2690 हेक्टेयर के बजाय सिर्फ 203 हेक्टेयर होगा। मौजूदा योजना के तहत 109 गांव प्रभावित होंगे। लेकिन पाइप कंड्यूइट नहर बनने पर कोई गांव प्रभावित नहीं होगा। राज्य सरकार का दावा है कि मौजूदा नहर से 4.5 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकती है। जबकि टनल या पाइप कंड्यूइट नहर से 6.12 लाख हेक्टेयर सिंचाई संभव होगीसिंचाई का क्षेत्रफल डेढ़ लाख हेक्टेयर बढ़ जाएगा। ये काम पहले से तय लागत में किए जा सकते हैं। पाइप कंड्यूइट: इस नहर प्रणाली में पानी को जमीन के अंदर पाइप या टनल के माध्यम से बहाया जाता है। अब 87 हजार करोड़ के 453 सिंचाई प्रोजेक्ट पर ध्यान जल संसाधन विभाग और एनवीडीए अब 453 सिंचाई प्रोजेक्ट पूरा करने में लगे हैं। इनमें 42 बड़ी, 66 मध्यम और 345 छोटी परियोजनाएं शामिल हैं। इन पर 87 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। अगले एक-दो साल में परियोजनाएं पूरी होने पर 25 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। प्रदेश का कुल सिंचाई रकबा 68–70 लाख हैक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा 177 नए प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए हैं। केन-बेतवा लिंक बुंदेलखंड के 10 जिलों की 44 लाख आबादी को फायदा देगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल प्रोजेक्ट से मालवा-निमाड़ का विकास होगा। सभी बड़े प्रोजेक्ट की सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रस्ताव मंजूर तो भूमि ​अधिग्रहण कम होगा
संशोधित केन-बेतवा लिंक प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया है। आयोग ने विस्तार से चर्चा और प्रजेंटेशन के लिए बुलाया है। यदि प्रस्ताव मंजूर हुआ, तो भूमि अधिग्रहण कम होगा और ग्रामीण सहयोग मिलेगा। पिछले दो साल में बड़े सिंचाई लक्ष्य पूरे किए, अगले तीन साल के लक्ष्य पूरी तैयारी के साथ हैं।
– तुलसी सिलावट, मंत्री, जलसंसाधन विभाग ऊर्जा उत्पादन में भी बढ़ोतरी… मौजूदा योजना में 78 मेगावाट बिजली बन सकती है। लेकिन टनल/पाइप नहर से 200 मेगावाट उत्पादन संभव होगा। यानी ढाई गुना अधिक ऊर्जा उत्पादन।
समय की बचत: खुली नहर बनाने में 20-30 साल लग सकते हैं। कंड्यूइट नहर 6–7 साल में तैयार हो जाएगी। यह तर्क बरगी, बाणसागर नहर प्रणाली के निर्माण अनुभव पर आधारित है।

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