आईएएस अफसर संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि जिस कूटरचित आदेश के आधार पर वर्मा को आईएएस अवॉर्ड हुआ, वह तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विजेंद्र सिंह रावत की कोर्ट से जारी हुआ था। बाद में जज को निलंबित कर दिया गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, वर्मा ने निलंबित जज रावत को दो दिन में 100 से अधिक बार कॉल किया था। जांच में यह भी पता चला कि जिस दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, वर्मा और जज रावत की मोबाइल लोकेशन जिला कोर्ट परिसर और इंदौर की रेजीडेंसी कोठी क्षेत्र में मिली। इन दो दिनों में दोनों के बीच लगातार संपर्क रहा। इससे दस्तावेज बनाने में साठगांठ की आशंका बढ़ गई। इधर, मप्र सरकार ने आईएएस वर्मा की बर्खास्तगी और अवॉर्ड वापस लेने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को शुक्रवार देर रात भेजा है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने तथ्यात्मक रिपोर्ट भी केंद्र के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भेजी है। आंदोलन स्थगित: वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ब्राह्मण संगठनों ने रविवार को सीएम हाउस घेराव की चेतावनी दी थी। लेकिन केंद्र को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद आंदोलन 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया है। प्रस्ताव में 23 नवंबर को ब्राह्मण बेटियों पर दिए गए वर्मा के बयान को सामाजिक समरसता बिगाड़ने और अमर्यादित आचरण वाला बताया गया। पहले ये कह चुके… जीएडी ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट में लिखा- जांच जारी है सितंबर 2020 में डीपीसी की बैठक के दौरान वर्मा के खिलाफ आपराधिक प्रकरण लंबित था, इसलिए उनका नाम अंतरिम रूप से चयन सूची में रखा गया। अक्टूबर 2020 में वर्मा ने जीएडी को न्यायालय से प्राप्त दोषमुक्ति आदेश की प्रति दी और इंदौर पुलिस की राय के आधार पर उन्हें आईएएस अवॉर्ड दिया गया। 2021 में पुनः जांच हुई, जिसमें पुलिस ने स्पष्ट किया कि 2020 में कोई अंतिम दोषमुक्ति आदेश पारित नहीं हुआ। जुलाई 2021 में उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर 48 घंटे से अधिक हिरासत में रखने के कारण निलंबित किया गया। 2022 में वर्मा ने कैट में याचिका दी, जिसने निलंबन अवधि बढ़ाने वाले विभागीय आदेश को निरस्त किया। जनवरी 2025 में पुनर्बहाली हुई। 2024 में उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी हुआ और विभागीय जांच अभी जारी है। वर्मा को बर्खास्त करना है या नहीं… फैसला केंद्र ही करेगा


