छोटा गणपति पर स्टेशन बनाने के लिए 66 मकान अधिग्रहित करना होंगे, वहां लोगों का भारी विरोध है पलासिया से बड़ा गणपति तक की अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन के लिए मेट्रो के अफसर भी छोटा गणपति पर स्टेशन बनाने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने सुभाष मार्ग पर जूना रिसाला और नीलकंठ कॉलोनी के बीच जगह भी चिह्नित की है और उस जगह के चयन के फायदे भी गिनाए हैं। भास्कर ने मेट्रो प्रबंधन के अंदरुनी दस्तावेज, फील्ड रिपोर्ट, इंजीनियरिंग इंस्ट्रक्शन ड्राफ्ट व कॉन्ट्रेक्ट क्लॉज निकाले तो खुलासा हुआ विवाद सिर्फ लोकेशन बदलने का नहीं, बल्कि 66 निजी प्रॉपर्टी अधिग्रहण, जनता के भारी विरोध, तकनीकी जोखिम, करोड़ों के अतिरिक्त खर्च व कोर्ट केसों का भी है। मेट्रो प्रबंधन स्पष्ट तौर पर छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन को सुभाष मार्ग पर शिफ्ट करने का पक्ष ले रहा है लेकिन अभी भी अधिकारिक तौर पर इसे सिरे से नकारा जा रहा है। सुभाष मार्ग बना सेफ जोन: खुली सड़क, सरकारी जमीन और भविष्य का कमर्शियल फायदा एमपीएमआरसीएल की 18 जून 2025 की फील्ड रिपोर्ट (पत्र ref. MPMRCL/IND/2/313) बताती है कि एमजी रोड स्थित मूल स्टेशन के लिए ‘कट एंड कवर’ पद्धति अपनाई जाना थी। इसमें 66 निजी संपत्तियों का अधिग्रहण होना था। साथ ही कई भवनों के तोड़-फोड़ आदेश जारी होते, व्यापारियों व परिवारों को अस्थायी विस्थापन कराया जाता। दस्तावेज में साफ लिखा है कि स्थानीय लोगों ने अधिग्रहण का ‘कड़ा विरोध’ किया और प्रबंधन सर्वे तक नहीं कर पाया। मेट्रो का विकल्प: एनएटीएम… लेकिन जनता नहीं मानी
टेंडर में विकल्प था कि स्टेशन को आधा कट एंड कवर + आधा एनएटीएम (सुरंग) से बनाया जा सकता है, ताकि भवन न तोड़े जाएं। लेकिन कॉन्ट्रेक्टर एचसीसी-टीपीएल ने लिखा कि ‘एनएटीएम तभी संभव है, जब निवासी अनुमति दें’। विरोध के चलते सर्वे नहीं हुआ। दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि काम रुकने से प्रोजेक्ट में भारी देरी और क्लेम का खतरा है। विवाद हाईकोर्ट पहुंचा- एक केस खारिज, दूसरा लंबित
भास्कर को मिली नोटशीट के अनुसार: सुभाष मार्ग क्यों चुना?: मेट्रो प्रबंधन ने 5 बड़े कारण लिखे
सुभाष मार्ग पर जमीन का सर्वे मेट्रो के अधिकारियों ने रहवासियों के साथ किया। अधिकारियों ने यहां स्टेशन बनाने पर पेंच नहीं आने के पांच कारण बताए –
1. तेज निर्माण संभव: सुभाष मार्ग खुला है, चारों ओर से अप्रोच आसान। एमजी रोड पर ट्रैफिक व भीड़ से काम की रफ्तार स्लो हो सकती है।
2. जोखिम कम: एनएटीएम तकनीक से पुराने भवनों के नीचे टनल बनाना ‘उच्च जोखिम’ वाला है।
3. सरकारी भूमि उपलब्ध: नया स्थान निगम व पुलिस विभाग की जमीन पर, अधिग्रहण का झंझट नहीं।।
4. राइडरशिप में कमी नहीं: रेसिडेंशियल कैचमेंट सुभाष मार्ग घनी आबादी को कवर करता है।
5. भविष्य में फायदा: स्टेशन के ऊपर एफएआर से कमर्शियल डेवलपमेंट संभव। ये है आर्थिक तस्वीर- कहां, कितना होगा खर्च? मेट्रो के एमडी ने कहा अभी कोई बदलाव नहीं
मेट्रो के एमडी एस कृष्ण चैतन्य ने कहा अभी छोटा गणपति स्टेशन को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है, जैसा पहले की डिजाइन में तय किया गया था। अभी तक उसी पर काम चल रहा है।


