झारक्राफ्ट को बंडी-शॉल का वर्कऑर्डर मिलने की संभावना केंद्र सरकार के अल्टीमेटम के बाद समाज कल्याण एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को बंडी और शॉल देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह वही योजना है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 में 6.10 करोड़ रुपए दिए थे, लेकिन छह साल तक यह राशि खर्च ही नहीं हो सकी। अब केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि राशि वापस किया जाए या फिर एसपीआरएसएच (स्पर्श) में भेजे जाएं। इसके बाद समाज कल्याण निदेशालय ने आनन-फानन में टेंडर निकालकर उसे निष्पादित कर दिया है। आगे की कार्रवाई और वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए फाइल विभागीय सचिव के पास भेजी गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह काम झारक्राफ्ट को मिलने की संभावना है। दिलचस्प यह है कि जहां झारखंड के अधिकतर विभाग केंद्रीय राशि समय पर नहीं मिलने का रोना रोते हैं, वहीं समाज कल्याण बाल विकास विभाग में तस्वीर उलट है। यहां पूरी केंद्रीय राशि उपलब्ध होने के बावजूद वह प्रक्रियाओं के जाल में उलझकर वर्षों तक खर्च ही नहीं हो सकी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2018-19 में राज्य की 38,432 आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं को अतिरिक्त पोशाक के रूप में हैंडलूम से बनी एक बंडी और एक शॉल देने के लिए शत-प्रतिशत केंद्रीय मद से 6.10 करोड़ रुपए दिए थे। छह साल बीत जाने के बाद अब केंद्र ने सख्ती दिखाई तो विभाग हरकत में आया। टेंडर निष्पादित हो गया है, जल्द ही वर्क ऑर्डर निकलेगा : निदेशक बंडी और शॉल का टेंडर निष्पादित हो चुका है। आगे की कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा और सेविकाओं को यह मिल जाएगा।-किरण कुमारी पासी, निदेशक, समाज कल्याण निदेशक पिछले छह सालों में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। वर्ष 2018-19 में यह संख्या 38,432 थी, अब यह बढ़कर करीब 78 हजार हो गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सेविकाओं के चयन का आधार क्या है। साथ ही, करीब 40 हजार सेविका-सहायिकाओं को बंडी-शॉल किस मद से दी जाएगी। इस मुद्दे पर विभागीय अधिकारी अभी मंथन कर रहे हैं।


