टोंक जिला मुख्यालय पर वर्षों से संचालित ऑफलाइन रेल टिकट बुकिंग काउंटर के अचानक बंद होने से आम यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। जिला अब भी प्रत्यक्ष रेल सुविधा से वंचित है और ऐसे में एकमात्र टिकट काउंटर का बंद होना यात्रियों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। काउंटर बंद होने के बाद आम नागरिकों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों और ऑनलाइन टिकट बुकिंग से अनजान लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टिकट लेने के लिए लोगों को अब निवाई, सवाई माधोपुर या जयपुर जैसे दूरस्थ रेलवे स्टेशनों तक जाना पड़ रहा है। इससे समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। यात्रियों का कहना है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग को विकल्प के रूप में बताना व्यावहारिक नहीं है। जिले के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल भुगतान की सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में ऑफलाइन काउंटर बंद होने से आमजन के लिए यात्रा की योजना बनाना मुश्किल हो गया है। रेलवे प्रशासन के प्रति लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जिला मुख्यालय पर टिकट काउंटर होने से यात्रियों को काफी राहत मिलती थी। अचानक इसे बंद किए जाने से बिना किसी सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के आमजन को असुविधा में डाल दिया गया है। इससे रेलवे प्रशासन के प्रति लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। बुकिंग काउंटर वापस शुरू करने की मांग इस पूरे मामले को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। टोंक–सवाई माधोपुर के सांसद हरीश चन्द्र मीना ने उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर टोंक जिला मुख्यालय पर रेल टिकट बुकिंग काउंटर को तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसे संसद में उठाया जाएगा।


