धमतरी में ई-चालान से टैक्सी-ऑटो चालक परेशान:RTO पर आरोप- परमिट न होने से इंश्योरेंस-फिटनेस के बावजूद कट रहे चालान

छत्तीसगढ़ के धमतरी में टैक्सी और ऑटो चालक ई-चालान से परेशान हैं। उन्होंने ऑटोमेटिक कैमरों से काटे जा रहे चालानों का विरोध किया है। चालकों ने आरटीओ विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इंश्योरेंस और फिटनेस बनवाने के बावजूद परमिट न होने के कारण उनकी समस्या बनी रहती है। टैक्सी और ऑटो संघ के चालकों को शहर के चौराहों पर लगे ऑटोमेटिक कैमरों से लगातार ऑनलाइन चालान मिल रहे हैं। ये चालान मुख्य रूप से फिटनेस और इंश्योरेंस से संबंधित हैं। चालकों का आरोप है कि वे आरटीओ कार्यालय में इंश्योरेंस और फिटनेस तो बनवा लेते हैं, लेकिन परमिट न होने के कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं होता। चालकों का कहना है कि जब विभाग परमिट जारी नहीं कर रहा है, तो इंश्योरेंस और फिटनेस के नाम पर शुल्क लेकर उन्हें दोहरी परेशानी में डाला जा रहा है। कई चालकों के एक ही दिन में 8 हजार से लेकर 60 हजार रुपये तक के चालान काटे जा रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उन्हें राजधानी रायपुर जाकर जानकारी लेने को कहा जा रहा है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। 2023 से अब तक के चालान भेजे जा रहे- टैक्सी व्यवसायी टैक्सी व्यवसायी सैयद आसिफ अली ने बताया कि ऑटोमेटिक कैमरे लगे हुए मुश्किल से 15 दिन ही हुए हैं, लेकिन उन्हें वर्ष 2023 से अब तक के चालान भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताया। आसिफ अली के अनुसार, 15 दिन के चालान समझ में आते हैं, लेकिन एक-एक दिन के लिए 8 हजार से 30 हजार रुपए तक के चालान भेजे जा रहे हैं, जो एक तरह की ‘लूट’ है। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस समस्या पर ध्यान देने और सही कागजात उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कागजात बनवाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। सरकार फिटनेस बनवाने की बात करती है और आरटीओ विभाग फिटनेस व बीमा कराने को कहता है, लेकिन परमिट जारी नहीं किया जा रहा है। जबकि परमिट की फीस केवल 500 रुपये है और फिटनेस पर लगभग 40 हजार रुपये खर्च होते हैं। आरोप है कि राजस्व के लिए फिटनेस बनवाने पर जोर दिया जा रहा है। परमिट नहीं होने के कारण वे बिना पूरे कागजात के माने जा रहे हैं और ऑटोमेटिक कैमरे लगातार चालान काट रहे हैं। अब तक 70 से 80 लोगों के चालान कट चुके हैं। सरकार पूरा पेपर बनाकर नहीं दे रही पन्नालाल देवांगन ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से टैक्सी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इसी टैक्सी के माध्यम से उनका परिवार चलता है। उन्होंने बताया कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार पूरा पेपर बनाकर नहीं दे रही है। ऐसे में वे किस आधार पर कागजात बनवाएं। उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस पर ही 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस तरह सालाना करीब 40 हजार रुपये का खर्च आ जाता है। अधूरे कागजात होने पर भी ई-चालान कट ही जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ई-चालान भरने के लिए उन्हें रायपुर जाना पड़ता है, तो फिर जिले में आरटीओ कार्यालय होने का क्या मतलब है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोज ई-चालान कट रहे हैं और इसके बावजूद सड़क किनारे चार अधिकारी बैठे रहते हैं, जो फिर से चालान काटते हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि टैक्सी चालकों को बताएं कि वे अपना घर बेचें या क्या बेचें, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

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